होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ते तनाव की वजह से आने वाले कुछ सालों में दुनिया भर में खाने-पीने की चीज़ों के दाम बढ़ सकते हैं। सिंगापुर की नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डैनी क्वाह ने चेतावनी दी है कि खाद की सप्लाई चेन बिगड़ने से खेती पर बुरा असर पड़ेगा। इससे आम लोगों की जेब पर बोझ बढ़ना तय है और इसकी गूँज अगले दो से पाँच सालों तक सुनाई दे सकती है।

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दुनिया भर में खाने-पीने की चीज़ें क्यों होंगी महंगी?

प्रोफेसर डैनी क्वाह ने ANI के साथ बातचीत में बताया कि Strait of Hormuz दुनिया के लिए खाद और उसके कच्चे माल के आने-जाने का सबसे मुख्य रास्ता है। यहाँ तनाव होने से सप्लाई चेन टूट गई है, जिसे उन्होंने एक बड़ा सप्लाई शॉक बताया है। उनका कहना है कि इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्लैगफ्लेशन (Stagflation) की स्थिति आ सकती है, जिसका मतलब है कि विकास की रफ़्तार धीमी होगी और चीज़ों के दाम बढ़ेंगे। इसका सबसे बुरा असर गरीब और कम आय वाले लोगों पर पड़ेगा क्योंकि अनाज की उपलब्धता कम होगी और कीमतें आसमान छुएंगी।

खाद की कीमतों और सप्लाई पर क्या असर पड़ा?

FAO के महानिदेशक QU Dongyu ने बताया कि इस रास्ते से होने वाला टैंकर ट्रैफिक 90% से ज़्यादा गिर गया है। इसकी वजह से दुनिया के कई हिस्सों में यूरिया और अन्य खादों के दाम तेज़ी से बढ़ गए हैं। नीचे दी गई टेबल से समझा जा सकता है कि यह संकट कितना गहरा है:

क्षेत्र/देश कीमत में बढ़ोतरी / प्रभाव
अमेरिका (US) यूरिया की कीमत 52% बढ़ी
ब्राज़ील (Brazil) यूरिया की कीमत 60% बढ़ी
मिस्र (Egypt) यूरिया की कीमत 28% बढ़ी
मध्य पूर्व (Middle East) ग्रेनुलर यूरिया 20% महंगा हुआ
वैश्विक औसत (2026 की पहली छमाही) खाद की कीमतों में 15-20% की वृद्धि
शिपिंग ट्रैफिक 90% से ज़्यादा की गिरावट
भारत का आयात (खाद) लगभग 35% खादों की निर्भरता गल्फ देशों पर

भारत और अन्य देशों के लिए कितना बड़ा खतरा है?

FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने चेतावनी दी है कि भारत में खाद्य मुद्रास्फीति (Food Inflation) का खतरा बढ़ गया है। भारत अपनी खाद की ज़रूरतों का एक बड़ा हिस्सा गल्फ देशों से आयात करता है, जिससे खरीफ सीजन की बुआई पर असर पड़ सकता है। अगर किसानों को सही समय पर और सही दाम पर खाद नहीं मिली, तो गेहूं, चावल और मक्के जैसी फसलों की पैदावार कम होगी। इसका असर केवल भारत ही नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया और अफ्रीका के देशों जैसे बांग्लादेश, श्रीलंका और सूडान पर भी पड़ेगा।

UN के अधिकारियों और अमेरिका के प्रतिनिधि माइक वॉल्ट्ज ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। दुनिया के करीब 15% उर्वरक इसी रास्ते से गुजरते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इस मानवीय संकट को रोकने के लिए एक टास्क फोर्स बनाई है ताकि खाद और कच्चे माल की आपूर्ति बहाल की जा सके।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Strait of Hormuz में तनाव से खाने के दाम कैसे बढ़ेंगे?

दुनिया की एक-तिहाई खाद इसी रास्ते से गुजरती है। यहाँ रुकावट आने से खाद की कमी होगी, जिससे फसलों की पैदावार घटेगी और बाजार में अनाज कम होने से कीमतें बढ़ जाएंगी।

भारत पर इसका क्या असर पड़ेगा?

भारत अपनी खाद का करीब 35% हिस्सा गल्फ देशों से मंगाता है। सप्लाई चेन बिगड़ने से खाद महंगी होगी और खरीफ सीजन की खेती प्रभावित होगी, जिससे देश में खाने-पीने की चीज़ें महंगी हो सकती हैं।