Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को लेकर European Commission ने एक बड़ा बयान दिया है। आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि इस अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर किसी भी तरह का टैक्स या फीस नहीं लगाई जा सकती। अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक यह समुद्री रास्ता सबके लिए मुफ्त और सुरक्षित होना चाहिए, क्योंकि पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति और अर्थव्यवस्था के लिए यह मार्ग बहुत जरूरी है। यह बयान ऐसे समय पर आया है जब ईरान द्वारा इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों पर भारी फीस लगाने की चर्चाएं चल रही हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानूनों के तहत क्या हैं नियम?

European Commission के प्रवक्ता Anouar El Anouni ने ब्रुसेल्स में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जानकारी दी कि अंतरराष्ट्रीय कानून और UN Convention on the Law of the Sea (UNCLOS) के तहत समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही बिल्कुल मुफ्त होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक जहाजों से किसी भी तरह का भुगतान या फीस मांगना गलत है। आयोग ने इस बात पर जोर दिया है कि ‘Freedom of Navigation’ एक सार्वजनिक अधिकार है जिसकी सुरक्षा हर हाल में सुनिश्चित की जानी चाहिए ताकि वैश्विक व्यापार प्रभावित न हो।

ईरान और UAE की तरफ से क्या स्थिति है?

ईरान ने हाल ही में प्रस्ताव दिया था कि वह Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों पर फीस लगा सकता है, जो लगभग 20 लाख डॉलर प्रति जहाज तक हो सकती है। इसके जवाब में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अन्य यूरोपीय देशों ने कड़ी आपत्ति जताई है। UAE के राजनयिक सलाहकार Anwar Gargash ने स्पष्ट किया है कि इस जलमार्ग का इस्तेमाल राजनीतिक बातचीत में दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत जैसे देशों के लिए भी यह रास्ता बहुत अहम है क्योंकि यहाँ से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल भारत पहुँचता है।

संबंधित पक्ष मुख्य स्थिति / अपडेट
European Commission बिना किसी फीस के स्वतंत्र आवाजाही की मांग
UAE प्रशासन जलमार्ग की सुरक्षा को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी बताया
ईरान का प्रस्ताव प्रति जहाज 20 लाख डॉलर तक की फीस लगाने की बात
UN Security Council प्रस्ताव 2817 के तहत जहाजों पर हमलों की निंदा की गई
Adnoc (Sultan Al Jaber) ऊर्जा सुरक्षा के लिए बिना किसी प्रतिबंध के रास्ता खुला रखने पर जोर

प्रवासियों और व्यापार पर इसका क्या असर होगा?

Strait of Hormuz से दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल गुजरता है। अगर यहाँ किसी भी तरह की फीस लगती है या आवाजाही बाधित होती है, तो इसका सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और विशेष रूप से भारतीय मूल के व्यापारियों के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई बढ़ सकती है। यूरोपीय नेताओं और UAE ने मांग की है कि ईरान को इस रास्ते पर किसी भी तरह का टैक्स लगाने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.