Strait of Hormuz में चल रहे संकट से दुनिया पर गहराया खाद और भोजन का खतरा, सऊदी अरामको के सीईओ ने दी चेतावनी

सऊदी अरब की दिग्गज कंपनी Saudi Aramco के अध्यक्ष और सीईओ Amin bin Hassan Al-Nasser ने दुनिया को एक गंभीर खतरे के प्रति आगाह किया है। 4 अगस्त 2026 को अपनी तिमाही नतीजों के बाद उन्होंने बताया कि Strait of Hormuz में जारी तनाव न केवल तेल की सप्लाई को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह पूरी दुनिया के लिए food security यानी भोजन की सुरक्षा के लिए एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है। उन्होंने इसे इतिहास का सबसे बड़ा तेल सप्लाई का झटका बताया है।
खाद और अनाज की सप्लाई पर मंडराया संकट
Amin bin Hassan Al-Nasser ने साफ शब्दों में कहा कि यह समुद्री रास्ता केवल तेल के लिए नहीं, बल्कि दुनिया के लिए खाद यानी फर्टिलाइजर बनाने वाले जरूरी कच्चे माल के लिए एक बहुत महत्वपूर्ण कड़ी है। दुनिया भर में जो खाद इस्तेमाल होती है, उसका करीब एक-तिहाई हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो खेतों तक खाद पहुंचना मुश्किल हो जाएगा जिसका सीधा असर दुनिया भर में अनाज की पैदावार पर पड़ेगा। International Trade Centre (ITC) की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2025 से अप्रैल 2026 के बीच इस रास्ते से होने वाले एक्सपोर्ट में भारी गिरावट आई है। इस दौरान नेचुरल गैस की सप्लाई में 95% और यूरिया के एक्सपोर्ट में 83% तक की कमी दर्ज की गई है।
दुनिया पर गहराया फूड क्राइसिस का डर
इस संकट पर चिंता जताते हुए ईरान के कृषि क्षेत्र के सलाहकार Arsalan Ghasemi ने 2 अगस्त 2026 को चेतावनी दी कि अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी और समुद्री रास्ते के बंद होने से पूरी दुनिया खाद्य सुरक्षा के मामले में बंधक बन गई है। इससे पहले 19 मई 2026 को यूके की विदेश मंत्री Yvette Cooper ने भी इस स्थिति को ग्लोबल फूड क्राइसिस की शुरुआत बताया था और कहा था कि इस रास्ते को जल्द से जल्द खोलना बेहद जरूरी है। पिछले एक साल में 12 प्रमुख ऊर्जा और औद्योगिक उत्पादों की एक्सपोर्ट मात्रा में कुल 54% की गिरावट देखी गई है।
सऊदी अरब ने निकाला नया रास्ता
हूती हमलों और समुद्री रास्तों में आ रही दिक्कतों को देखते हुए सऊदी अरब ने अपने तेल एक्सपोर्ट के लिए दूसरे रास्तों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। Saudi Aramco अपनी मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करते हुए अब तेल की सप्लाई को Suez Canal और SUMED pipeline के जरिए भूमध्य सागर की ओर मोड़ रहा है। इन तमाम क्षेत्रीय चुनौतियों के बावजूद, कंपनी ने अपनी रणनीति में बदलाव करके दूसरी तिमाही में अपने शुद्ध लाभ में 44% की बढ़ोतरी हासिल की है। यह घटनाक्रम भारत जैसे देशों के लिए भी अहम है क्योंकि खाड़ी देशों से होने वाली किसी भी तरह की सप्लाई में देरी का असर सीधे तौर पर वहां की महंगाई और खाद्य कीमतों पर पड़ता है।