मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भारतीय जहाजों की सुरक्षा को लेकर बड़ी खबर आई है. भारत सरकार के अधिकारी लगातार ईरान और अन्य देशों के संपर्क में हैं ताकि हमारे जहाजों और नाविकों को सुरक्षित निकाला जा सके. ताजा आंकड़ों के मुताबिक अभी भी 18 भारतीय झंडे वाले जहाज वहां फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने की प्रक्रिया जारी है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और भारतीय नौसेना स्थिति पर नजर रख रही है.

📰: ईरान ने अमेरिका पर लगाया बड़ा आरोप, पायलट रेस्क्यू के बहाने यूरेनियम चुराने की साजिश का किया दावा.

जहाजों की वर्तमान स्थिति और फंसे होने का कारण

5 अप्रैल 2026 तक मिली ताजा जानकारी के अनुसार, ‘ग्रीन आशा’ नाम का भारतीय ध्वज वाला जहाज सफलतापूर्वक इस रास्ते को पार कर गया है. इसके साथ ही अब तक कुल नौ जहाज सुरक्षित रूप से बाहर निकल चुके हैं. हालांकि, शुरू में फंसे जहाजों की संख्या कम बताई गई थी, लेकिन मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार अभी भी 18 जहाज वहां मौजूद हैं. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुए संघर्ष की वजह से इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है.

तारीख फंसे हुए भारतीय जहाजों की स्थिति
12 मार्च 2026 28 जहाज क्षेत्र में मौजूद थे
16 मार्च 2026 22 जहाज पश्चिमी हिस्से में थे
30 मार्च 2026 19 जहाज फंसे हुए थे
5 अप्रैल 2026 18 जहाज अब भी वहां मौजूद हैं

भारत सरकार और ईरान के बीच क्या बातचीत हुई?

भारतीय विदेश मंत्रालय इस मामले में काफी सक्रिय है और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने खुद ईरान के अधिकारियों से बात की है. ईरान ने भारत को आश्वासन दिया है कि वह भारतीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए तैयार है क्योंकि भारत उनका मित्र देश है. इसके अलावा, जहाजों पर सवार नाविकों की सुरक्षा को देखते हुए भारतीय नौसेना के युद्धपोत भी तैनात किए गए हैं ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके. मुख्य जानकारी इस प्रकार है:

  • ईरान ने ‘गैर-शत्रुतापूर्ण’ जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का वादा किया है.
  • जहाजों पर ईरान द्वारा कोई अतिरिक्त टोल या टैक्स नहीं लगाया जा रहा है.
  • शिपिंग मंत्रालय भारतीय चालक दल के सदस्यों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है.
  • भारतीय नौसेना ने जहाजों और कार्गो की सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी बढ़ा दी है.
  • 5 मार्च को हुई समीक्षा बैठक में नाविकों के परिवारों को भी राहत देने के निर्देश दिए गए थे.