होर्मुज की जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चल रहे तनाव के बीच यूरोपीय संघ और दुनिया के 40 से अधिक देशों ने कड़ा रुख अपनाया है। ईरान की ओर से जहाजों के गुजरने पर फीस वसूलने की कोशिशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खारिज कर दिया गया है। व्यापारिक जहाजों की आवाजाही 95 प्रतिशत तक गिर गई है, जिससे खाने के सामान और ईंधन की सप्लाई पर बुरा असर पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र अब खाद और भोजन की सुरक्षित आवाजाही के लिए खास रास्ता बनाने की तैयारी में जुटा है।

व्यापारिक जहाजों और समुद्री रास्ते पर क्या असर हुआ है?

यूरोपीय संघ और ब्रिटेन की अगुवाई में हुई बैठक में साफ कहा गया है कि ईरान को जहाजों से टैक्स वसूलने का कोई हक नहीं है। पिछले कुछ दिनों में इस रास्ते से होने वाले व्यापार में भारी कमी आई है, जिसे लेकर दुनिया भर के देश चिंतित हैं।

  • ट्रैफिक में गिरावट: UNCTAD के अनुसार समुद्री यातायात में लगभग 95 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
  • टैक्स का विरोध: ईरान द्वारा जहाजों से फीस वसूलने की खबरों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध माना गया है।
  • रास्ता खोलने की मांग: 40 देशों ने मिलकर इस रास्ते को बिना किसी शर्त के तुरंत खोलने की अपील की है।
  • ईरान का बयान: ईरान ने मानवीय सहायता वाले जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का भरोसा दिलाया है।

आम जनता और प्रवासियों के लिए क्या चुनौतियां हैं?

इस संकट की वजह से खाड़ी देशों और भारत जैसे देशों के बीच होने वाले व्यापार पर सीधा असर पड़ेगा। जरूरी सामानों की कमी होने से महंगाई बढ़ सकती है, जिससे वहां रहने वाले प्रवासियों का खर्चा भी बढ़ेगा।

प्रभाव का क्षेत्र होने वाला बदलाव
खाने का सामान अनाज और खाद की सप्लाई रुकने से कीमतें बढ़ सकती हैं
ईंधन और ऊर्जा तेल और गैस की सप्लाई में देरी होने की संभावना है
समुद्री सुरक्षा अगले हफ्ते से समुद्र से माइंस हटाने के लिए सैन्य चर्चा होगी
आर्थिक स्थिति महंगाई दर बढ़ने से आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ेगा

संयुक्त राष्ट्र की टास्क फोर्स और आगे की तैयारी

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने खाद और मानवीय सामान की आवाजाही के लिए एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया है। यह टीम समुद्र में सुरक्षित कॉरिडोर बनाने के लिए तकनीकी इंतजाम करेगी। यूरोपीय संघ की प्रमुख उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा है कि वैश्विक आर्थिक स्थिरता को बचाने के लिए वे अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करेंगे। अगले कुछ दिनों में समुद्र में फंसे जहाजों को निकालने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए सैन्य स्तर पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।