Strait of Hormuz: ईरान ने 15 जहाजों को दी रास्ता पार करने की इजाज़त, भारत और तुर्की के टैंकर भी शामिल, अब देना होगा भारी टैक्स.
ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए नियमों का ऐलान किया है। पिछले 24 घंटों के भीतर ईरान की अनुमति से करीब 15 जहाज इस रास्ते से सुरक्षित निकले हैं। इसमें भारत का गैस टैंकर और तुर्की के जहाज भी शामिल हैं। ईरान ने इराक को इन पाबंदियों से पूरी तरह छूट दे दी है, जिसके बाद इराकी तेल लेकर जा रहे टैंकर सुरक्षित तरीके से अपने रास्ते पर बढ़ रहे हैं और इराक ने इसके लिए ईरान का शुक्रिया भी अदा किया है।
किन देशों के जहाज निकले और क्या रहे नए नियम?
ईरान ने साफ कर दिया है कि अब इस रास्ते से गुजरने के लिए उसकी शर्तों को मानना होगा। ओमान के साथ मिलकर ईरान अब ट्रैफिक की निगरानी कर रहा है और सुरक्षित रास्ता देने का वादा कर रहा है।
- भारत: भारतीय LPG टैंकर Green Sanvi सुरक्षित तरीके से इस जलडमरूमध्य को पार कर गया है।
- तुर्की: तुर्की के दो जहाज भी लंबे इंतज़ार के बाद ईरान की अनुमति से आगे बढ़े हैं।
- फ्रांस और जापान: फ्रांसीसी कंपनी CMA CGM और जापान के गैस कैरियर को भी हरी झंडी मिली।
- ओमान: ओमान के तीन जहाजों ने भी अपने तट के करीब से इस रास्ते को पार किया।
- इराक: इराक के Ocean Thunder टैंकर को सुरक्षित रास्ता दिया गया है।
भारी टैक्स और नए नियमों की पूरी जानकारी
ईरान अब इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों से भारी फीस वसूलने की तैयारी में है। खबरों के मुताबिक, अब चीनी युआन या स्टेबल कॉइन्स में पेमेंट करना होगा। बड़े जहाजों के लिए यह खर्चा बहुत ज्यादा हो सकता है।
| नियम का नाम | पूरी जानकारी |
|---|---|
| ट्रांजिट फीस (टैक्स) | बड़े तेल टैंकरों (VLCC) को लगभग 20 लाख डॉलर तक देने पड़ सकते हैं। |
| झंडा और सुरक्षा | सुरक्षित रहने के लिए जहाजों को दोस्त देशों का झंडा लगाने की सलाह दी गई है। |
| प्रतिबंध | अमेरिका और इजरायल से जुड़े जहाजों के प्रवेश पर पाबंदी जारी रहेगी। |
| परमिट सिस्टम | अब जहाजों को पहले से लाइसेंस और परमिट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। |
ईरान के अधिकारियों का कहना है कि यह नियम जहाजों की सुरक्षा और बेहतर सेवा देने के लिए बनाए गए हैं। हालांकि, समुद्री कानून के कुछ जानकार इन नए टैक्स और नियमों को अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ बता रहे हैं। पाकिस्तान ने भी इस बीच मध्यस्थता की पेशकश की है और अपने झंडे के नीचे जहाजों को सुरक्षा देने की बात कही है।




