ईरान की क्रांतिकारी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में 26 कमर्शियल जहाजों ने Strait of Hormuz को पार किया है. इस खबर ने दुनिया का ध्यान खींचा है क्योंकि अमेरिका और इसराइल के साथ युद्ध के कारण यहां हालात काफी तनावपूर्ण हैं. इसी बीच दक्षिण कोरिया का एक तेल टैंकर भी ईरान की अनुमति से इस रास्ते से गुजरा है.
Strait of Hormuz से जहाजों के निकलने के लिए क्या शर्तें हैं?
IRGC Navy ने बताया है कि इस समुद्री रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को अब पहले अनुमति (permit) लेनी होगी. जहाजों का आना-जाना IRGC Navy के साथ तालमेल और उनकी सुरक्षा में हो रहा है. ईरान सरकार ने अंतरराष्ट्रीय शिपर्स के लिए एक नया तरीका शुरू किया है ताकि सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित किया जा सके. ईरानी राजनीतिज्ञ इब्राहिम अजीजी ने बताया कि ट्रैफिक मैनेजमेंट और रास्ता शुल्क (fees) वसूलने के लिए जल्द ही नया सिस्टम लागू होगा.
अमेरिका और अन्य देशों का इस स्थिति पर क्या कहना है?
इस पूरे विवाद में अलग-अलग देशों के बीच खींचतान जारी है:
- अमेरिका: US CENTCOM ने जानकारी दी कि 13 अप्रैल 2026 से ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी की गई है. इसके तहत अब तक 88 जहाजों का रास्ता बदला गया और 4 जहाजों को रोका गया है.
- कतर: कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के नियमों के मुताबिक किसी भी देश को इस रास्ते को रोकने का हक नहीं है.
- चीन: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने इस पूरे विवाद को खत्म करने के लिए व्यापक युद्धविराम (ceasefire) की अपील की है.
- दक्षिण कोरिया: विदेश मंत्री चो ह्यून ने पुष्टि की कि उनका एक तेल टैंकर ईरान के अधिकारियों के समन्वय से गुजरा है, जो युद्ध के बाद पहला मामला है.
IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमले फिर से शुरू किए, तो यह युद्ध इस क्षेत्र से बाहर फैल सकता है.
Frequently Asked Questions (FAQs)
दक्षिण कोरियाई जहाज के गुजरने का क्या महत्व है
दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून ने पुष्टि की कि उनका एक तेल टैंकर ईरान के अधिकारियों के समन्वय से Strait of Hormuz से गुजरा है. यह ईरान युद्ध शुरू होने के बाद इस रास्ते से गुजरने वाला पहला दक्षिण कोरियाई जहाज है.
अमेरिका ने ईरान के खिलाफ क्या कदम उठाए हैं
अमेरिका ने 13 अप्रैल 2026 से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी शुरू की है. US CENTCOM के मुताबिक अब तक 88 जहाजों को मोड़ा गया है ताकि वे ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश न कर सकें.
