Strait of Hormuz में इन दिनों जहाजों का निकलना काफी जोखिम भरा हो गया है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, समुद्र के बीचों-बीच बारूदी सुरंगें (mines) बिछी हुई हैं, जिससे जहाजों के डूबने का खतरा बना हुआ है। इस वजह से समुद्री रास्ते पर तनाव काफी बढ़ गया है।

👉: Bandar Abbas Airport Update: ईरान के बंदर अब्बास एयरपोर्ट पर फिर शुरू हुई फ्लाइट्स, 4 महीने के सस्पेंशन के बाद लौटे विमान

समुद्र में बिछी हैं खतरनाक सुरंगें

रिपोर्ट्स के अनुसार, समुद्र के बीच वाले हिस्से में कई बारूदी सुरंगें मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि करीब 80 सुरंगें हो सकती हैं, जिनमें Maham 3 और Maham 7 जैसे हाई-एक्सप्लोसिव ब्लास्ट माइन्स शामिल हैं। ये सुरंगें इतनी आधुनिक हैं कि सोनार तरंगों को चकमा दे सकती हैं, जिससे इन्हें ढूंढना बहुत मुश्किल है। ईरान ने अभी तक इन सुरंगों की सही संख्या और जगह के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है।

ईरान और दुनिया के देशों के बीच खींचतान

ईरान का कहना है कि इन सुरंगों को हटाने का काम सिर्फ वही करेगा और किसी बाहरी देश की मदद नहीं लेगा। दूसरी तरफ, फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने 4 जुलाई 2026 को ऐलान किया कि फ्रांस ने सुरंगों को ढूंढने वाले जहाज और फ्रिगेट्स तैनात कर दिए हैं ताकि रास्ता सुरक्षित किया जा सके। अमेरिका ने भी कहा है कि उनके पास इन सुरंगों की जांच के लिए एडवांस मशीनें मौजूद हैं।

हाल की घटनाएं और चेतावनी

  • 25 जून 2026: ओमान के तट के पास एक सिंगापुर के जहाज पर हमला हुआ। अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की कि यह हमला ईरान के ड्रोन से हुआ था, जिससे जहाज के ऊपरी हिस्से (bridge) को नुकसान पहुंचा।
  • 4 जुलाई 2026: IRGC ने उन जहाजों को चेतावनी दी जो अमेरिका द्वारा बताए गए रास्ते का इस्तेमाल कर रहे थे। इसके बाद 6 जहाजों को अपना रास्ता बदलना पड़ा या वापस जाना पड़ा।
  • नया नियम: ईरान के समुद्री प्राधिकरण ने नियम बनाया है कि अब किसी भी जहाज को रास्ता पार करने से 48 घंटे पहले रिक्वेस्ट भेजनी होगी।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei और डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने साफ कहा है कि समुद्र की सुरक्षा की जिम्मेदारी तटवर्ती देशों की है। वहीं, ब्रिटेन और फ्रांस ने मिलकर एक अंतरराष्ट्रीय सैन्य मिशन बनाने की बात कही है, जिस पर ओमान ने अपनी सहमति दे दी है।