Strait of Hormuz के रास्ते तेल की आवाजाही को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बड़ी बहस छिड़ गई है। एक तरफ अमेरिका का दावा है कि समुद्री रास्ता खुला है और तेल की सप्लाई जारी है, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने इसे पूरी तरह बंद करने का ऐलान कर दिया है। बीच में फंसे जहाजों और ग्लोबल मार्केट के लिए यह स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
अमेरिका का दावा: 55 जहाजों ने किया सफर
U.S. Central Command (CENTCOM) ने 20 जून 2026 को बताया कि Strait of Hormuz से 55 मर्चेंट जहाज गुजरे हैं। इन जहाजों के जरिए 17 मिलियन बैरल से ज़्यादा तेल ग्लोबल मार्केट में भेजा गया है। अमेरिकी नौसेना के कैप्टन Tim Hawkins ने साफ किया कि ईरान का इस रास्ते पर नियंत्रण नहीं है और अमेरिकी सेना वहां जहाजों की सुरक्षा के लिए तैनात है ताकि रास्ता खुला रहे।
ईरान का पलटवार और नए नियम
वहीं दूसरी तरफ ईरान की IRGC Navy ने दावा किया कि उन्होंने इस रास्ते को सभी जहाजों के लिए बंद कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने युद्धविराम के वादों को तोड़ा है और इसराइल लेबनान पर हमले कर रहा है, इसलिए यह कदम उठाया गया है। इसके साथ ही ईरान ने Persian Gulf Strait Authority (PGSA) नाम की एक संस्था बनाई है, जिसने जहाजों के लिए नए नियम लागू किए हैं।
- जहाजों को अब PGSA.ir पोर्टल पर ऑनलाइन क्लियरेंस लेना होगा।
- सफर शुरू करने से कम से कम 48 घंटे पहले रिक्वेस्ट भेजनी होगी।
- जहाजों को ईरान के Larak island के पास तय रास्ते से ही गुजरना होगा।
- जहाजों के पास मान्य इंश्योरेंस और पूरी क्रू लिस्ट होनी जरूरी है।
अंतरराष्ट्रीय कानून और सुरक्षा की चेतावनी
UNCLOS कानून के मुताबिक Strait of Hormuz एक अंतरराष्ट्रीय रास्ता है, जिसे कोई भी देश अपनी मर्जी से बंद नहीं कर सकता। हालांकि ईरान इस कानूनी व्याख्या को नहीं मानता। Joint Maritime Information Center (JMIC) ने जहाजों को सलाह दी है कि वे तय रास्ते का पालन करें, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी है कि इलाके में बारूदी सुरंगें (mines) हो सकती हैं।
युद्ध के बाद की स्थिति
बता दें कि फरवरी 2026 में अमेरिका और इसराइल के हमलों के बाद ईरान के साथ युद्ध शुरू हुआ था, जिससे यह रास्ता लगभग बंद हो गया था। 18 जून 2026 को अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने ऐलान किया था कि अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी हटा ली है ताकि युद्ध खत्म हो सके। हालांकि, Kpler संस्था की रिपोर्ट के मुताबिक अभी भी जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी कम है क्योंकि शिपिंग कंपनियां अब भी डरी हुई हैं।
