दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz अब फिर से खुल गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने बताया कि अब जहाज यहाँ से आसानी से गुजर रहे हैं। लंबे समय तक बंद रहने के बाद यह खबर वैश्विक व्यापार और तेल बाजार के लिए बड़ी राहत लेकर आई है।
यह सब 17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक 14 पॉइंट के समझौते (MoU) के बाद मुमकिन हुआ। इस समझौते का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच विवाद को खत्म करना और जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू करना था। राष्ट्रपति Trump ने कहा कि इस डील के बाद अब ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और समुद्री रास्ता पूरी तरह खुला रहेगा।
समुद्री निगरानी कंपनियों Kpler और AXSMarine ने पुष्टि की कि 18 जून को करीब 25 कमर्शियल जहाजों ने इस रास्ते को पार किया। अप्रैल के मध्य के बाद यह सबसे ज्यादा संख्या थी और यह सामान्य दिनों के मुकाबले पांच गुना ज्यादा है। खास बात यह रही कि समझौते के कुछ ही घंटों बाद सऊदी अरब के तीन बड़े तेल टैंकर भी इस रास्ते से गुजरे।
जहाजों के लिए ईरान के नए नियम
ईरान ने इस रास्ते से गुजरने के लिए कुछ शर्तें तय की हैं, जिनका पालन करना सभी जहाजों के लिए जरूरी है:
- सभी जहाजों को Persian Gulf Strait Authority (PGSA) से परमिट लेना होगा।
- परमिट के लिए आवेदन करने के 48 घंटे के भीतर जवाब मिल जाएगा।
- यह परमिट सिर्फ एक बार यात्रा के लिए होगा और जारी होने के 5 दिनों तक मान्य रहेगा।
- ईरान ने 60 दिनों के लिए ट्रांजिट फीस माफ कर दी है, जिसका खर्च ईरान सरकार खुद उठाएगी।
- जहाजों को ईरान द्वारा तय किए गए सुरक्षित रास्तों (Safe Routes) पर ही चलना होगा।
इस बीच, स्विट्जरलैंड में होने वाली अमेरिका और ईरान की मुलाकातों को फिलहाल टाल दिया गया है। हालांकि, इसराइल और हिजबुल्ला के बीच हुए युद्धविराम को भी इस पूरे समझौते की सफलता के लिए काफी अहम माना जा रहा है। फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron और जर्मनी के चांसलर Friedrich Merz ने इस कदम का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि इससे तेल की कीमतों में कमी आएगी।
ईरान के विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि इस समझौते से युद्ध का तुरंत अंत हुआ है, हालांकि कुछ अधिकारियों ने पुराने समझौतों के टूटने का हवाला देते हुए सावधानी बरतने की बात भी कही है।