Strait of Hormuz: ओमान और ईरान के समझौते के बाद भी नहीं खुलेगा समुद्री रास्ता, जानें क्या है पूरी सच्चाई

Nura Basta6 August 20262 min read79 viewsOman
Strait of Hormuz: ओमान और ईरान के समझौते के बाद भी नहीं खुलेगा समुद्री रास्ता, जानें क्या है पूरी सच्चाई

हार्मूज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच ईरान की ओर से एक बड़ा स्पष्टीकरण सामने आया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने 5 से 6 अगस्त 2026 के दौरान साफ कर दिया है कि ओमान के साथ हो रहे किसी भी समझौते का मतलब यह नहीं है कि यह महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग तुरंत खोल दिया जाएगा। हालांकि ओमान और ईरान के बीच एक नए शिपिंग रूट को तैयार करने को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन ईरान का कहना है कि अभी स्थिति सामान्य नहीं हुई है।

समुद्री मार्ग खोलने की शर्तें

ईरान का अपना पक्ष है कि इस जलमार्ग को पूरी तरह से खोलने के लिए अमेरिका को पहले अपनी समुद्री नाकेबंदी हटानी होगी। ईरान के अधिकारियों का आरोप है कि अमेरिका उनके बंदरगाहों पर दबाव बना रहा है और ईरान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई कर रहा है। जब तक ये स्थितियां नहीं बदलतीं और एक नया सुरक्षा ढांचा तैयार नहीं होता, तब तक सामान्य आवाजाही संभव नहीं है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि ओमान के साथ उनकी बातचीत केवल दो देशों के बीच की है और इसमें अमेरिका सीधे तौर पर शामिल नहीं है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और विदेश मंत्री Marco Rubio ने इस संभावित समझौते में कुछ प्रगति होने के संकेत जरूर दिए हैं।

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शिपिंग रूट का नया प्रस्ताव

मौजूदा बातचीत में एक नया प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसके तहत जहाज दो अलग-अलग रास्तों का उपयोग करेंगे। ईरान की तरफ से आने वाले जहाजों के लिए एक अलग रूट होगा जिसे ईरान नियंत्रित करेगा, और ओमान की तरफ जाने वाले जहाजों के लिए एक दूसरा रूट होगा जो ओमान के नियंत्रण में होगा। इस प्रस्ताव की सबसे खास बात यह है कि इसमें किसी भी प्रकार के टोल या सर्विस शुल्क लेने की बात नहीं है। इसके अलावा, ईरान और ओमान के बीच एक अंतरिम समझौता भी चर्चा में है, जो 60 दिनों से लेकर 4 महीने तक चल सकता है। इसमें दोनों देश मिलकर समुद्री खदानों को साफ करने और सुरक्षा बनाए रखने का काम करेंगे।

मौजूदा स्थिति और समुद्री यातायात

हाल ही में UKMTO ने रिपोर्ट दी थी कि 6 अगस्त को इस जलमार्ग से गुजर रहे एक कमर्शियल टैंकर ने दो धमाकों की आवाज सुनी थी, हालांकि जहाज और उसका क्रू पूरी तरह सुरक्षित रहा। वर्तमान में इस रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम है। युद्ध से पहले जहाँ रोजाना औसतन 130 से 140 जहाज यहाँ से गुजरते थे, वहीं अब केवल 10 जहाज ही प्रतिदिन इस रास्ते का उपयोग कर पा रहे हैं। इस पूरे समझौते का अंतिम निर्णय ईरान के सर्वोच्च नेता Ayatollah Mojtaba Khamenei की मंजूरी पर टिका है, जिन्हें 28 फरवरी के बाद से सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। प्रवासी जो इस रूट से जुड़ी गतिविधियों पर नजर रखते हैं, उनके लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है कि फिलहाल स्थिति अस्थिर बनी हुई है।

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