दुनिया के तेल सप्लाई का सबसे अहम रास्ता ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ फिर से खुलने जा रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते के बाद अब यहां जहाजों की आवाजाही शुरू हो गई है. इस खबर का असर ग्लोबल मार्केट पर तुरंत दिखा और कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत मार्च के बाद पहली बार 80 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गई है.
समझौते की मुख्य बातें और तारीखें
अमेरिका और ईरान के बीच 14 जून 2026 को एक शुरुआती समझौते (MOU) की घोषणा की गई. इस समझौते का मकसद हालिया टकराव को खत्म करना और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना है. इस पूरी डील को करवाने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अहम भूमिका निभाई और मध्यस्थ के तौर पर काम किया.
इस समझौते के बाद 15 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों और जहाजों पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का ऐलान किया. उन्होंने साफ किया कि अब जहाज बिना किसी रोक-टोक के इस रास्ते से गुजर सकेंगे. इस डील पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड या जेनेवा में होने की उम्मीद है, जिसके बाद यह रास्ता पूरी तरह से सभी समुद्री ट्रैफिक के लिए खुल जाएगा.
तेल बाजार और शिपिंग पर असर
इस खबर के आते ही Brent North Sea कच्चे तेल की कीमतों में 3.72% की गिरावट आई और यह 80.08 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया. हालांकि, रास्ता पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए अब बारूदी सुरंगों (Mines) को हटाने का काम किया जाएगा, जिसमें कुछ हफ्ते या महीने लग सकते हैं.
| तारीख/विवरण | महत्वपूर्ण घटना |
|---|---|
| 11 जून 2026 | ईरान ने रास्ता बंद करने का ऐलान किया था |
| 14 जून 2026 | अमेरिका और ईरान के बीच MOU की घोषणा |
| 15 जून 2026 | अमेरिका ने नाकाबंदी हटाई और जहाज चलने शुरू हुए |
| 19 जून 2026 | फॉर्मल साइनिंग और रास्ता पूरी तरह खुलने की उम्मीद |
| प्रारंभिक 60 दिन | रास्ता टोल-फ्री रहेगा (ईरान बाद में फीस मांग सकता है) |
| 28 फरवरी 2026 | टकराव की शुरुआत हुई थी |
| कुल हमले | IMO ने 46 हमलों की पुष्टि की है |
कुवैत और अन्य देशों की स्थिति
कुवैत इस बंद रास्ते की वजह से काफी प्रभावित हुआ था, इसलिए कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इस समझौते का समर्थन किया है और शांति की अपील की है. कुवैत अब तेल भेजने के लिए वैकल्पिक पाइपलाइन रूट तलाश रहा है ताकि भविष्य में ऐसी दिक्कत न आए.
इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के महासचिव ने भी इस फैसले का स्वागत किया है. IMO अब उन हजारों नाविकों को सुरक्षित बाहर निकालने पर काम कर रहा है जो इस संघर्ष के कारण बीच रास्ते में फंसे हुए थे.