अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते के बाद हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है। सऊदी अरब के बड़े तेल टैंकरों ने इस रास्ते से निकलना शुरू कर दिया है, जिससे व्यापार में उम्मीद जगी है। हालांकि, शिपिंग संस्था BIMCO ने चेतावनी दी है कि यह रास्ता अभी भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।

🚨: Hormuz Strait Update: अमेरिका और ईरान के बीच समझौता, लेकिन BIMCO ने दी चेतावनी, जहाजों का निकलना अब भी खतरनाक

सऊदी टैंकरों की वापसी

18 जून 2026 को इस रास्ते पर कमर्शियल जहाजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी गई। सऊदी अरब के तीन बड़े सुपरटैंकर Awtad, Jaham और Shaden इस रास्ते से गुजरे, जिनमें करीब 60 लाख बैरल कच्चा तेल था। इनमें से कुछ जहाज पिछले कई हफ्तों से फारस की खाड़ी (Persian Gulf) के अंदर फंसे हुए थे। इनके अलावा फ्रांस का LNG कैरियर Mraikh और चीन का एक फ्यूल टैंकर भी इस रास्ते से बाहर निकला है।

BIMCO और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की चेतावनी

शिपिंग की दुनिया की सबसे बड़ी संस्था BIMCO ने कहा है कि भले ही समझौता हो गया हो, लेकिन सुरक्षा की स्थिति अब भी अस्थिर है। BIMCO के चीफ सेफ्टी ऑफिसर Jakob Larsen ने बताया कि अमेरिका और ईरान की तरफ से मिली जानकारी पूरी नहीं है और सुरक्षित रास्तों के बारे में अभी स्पष्टता नहीं है। उन्होंने जहाज मालिकों को सलाह दी है कि वे सावधानी बरतें और अपने कर्मियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।

बारूदी सुरंगों का खतरा और विदेशी मदद

समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस रास्ते में अभी भी ईरान द्वारा बिछाई गई बारूदी सुरंगें (mines) मौजूद हैं। इन्हें पूरी तरह हटाने में 40 से 50 दिन का समय लग सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) ने भी इन सुरंगों को हटाने के लिए एकजुट होकर काम करने की अपील की है।

जर्मनी के रक्षा मंत्री Boris Pistorius ने बताया कि उन्होंने रेड सी (Red Sea) में दो जहाज भेजे हैं, ताकि ज़रूरत पड़ने पर हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में माइन्स हटाने के मिशन में मदद की जा सके। उन्होंने यह भी साफ किया कि इस काम के लिए ईरान और ओमान की मंजूरी ज़रूरी होगी।

बीमा और व्यापार पर असर

Lloyd’s Market Association की CEO शीला कैमरून ने कहा कि बारूदी सुरंगों का डर व्यापार शुरू करने में एक बड़ी बाधा है। इस वजह से जहाजों के लिए वॉर-रिस्क इंश्योरेंस (war-risk insurance) का प्रीमियम अभी भी बहुत ज़्यादा है। इसके अलावा, लेबनान में इसराइल के हवाई हमलों ने भी शांति समझौते पर कुछ सवाल खड़े कर दिए हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.