गल्फ क्षेत्र में जारी तनाव के बीच एक बड़ी जानकारी सामने आई है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में सैकड़ों की संख्या में जहाज़ फंसे हुए हैं, जिनमें 426 तेल टैंकर और 53 गैस टैंकर शामिल हैं। ईरान ने हाल ही में अमेरिका के साथ दो हफ्ते के संघर्ष विराम के बाद इस रास्ते को अस्थायी रूप से खोलने पर सहमति जताई है, लेकिन समुद्री बारूदी सुरंगों के खतरे की वजह से मुख्य रास्ता अभी भी खतरनाक बना हुआ है।

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ईरान ने जारी किए नए नियम और टोल टैक्स की जानकारी

ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि जहाज़ों को सुरक्षित निकालने के लिए अब वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा, ईरान ने कमर्शियल जहाज़ों से गुजरने के लिए भारी-भरकम टोल टैक्स वसूलने की योजना भी बनाई है ताकि सुरक्षा का खर्चा निकाला जा सके।

  • ईरान प्रत्येक जहाज़ से करीब 20 लाख डॉलर यानी लगभग 16 करोड़ रुपये से ज्यादा का शुल्क ले सकता है।
  • ओमान भी इस समझौते के तहत रास्ता देने के लिए अपनी फीस वसूलने की तैयारी में है।
  • अमेरिका के राष्ट्रपति ने रास्ता खोलने की बात कही है, लेकिन व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि टोल टैक्स की बात पर सहमति नहीं है।
  • 8 अप्रैल को केवल 3 जहाज़ों को ही खाड़ी से बाहर निकलने की अनुमति मिली है।

फंसे हुए नाविकों और जहाजों की वर्तमान स्थिति

इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) के अनुसार, मार्च के अंत तक करीब 20,000 नागरिक नाविक इन जहाज़ों पर फंसे हुए थे। इन लोगों को खाने-पीने की कमी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ रहा है। संयुक्त राष्ट्र ने सुरक्षित कॉरिडोर की अपील की है ताकि इन लोगों को निकाला जा सके।

जानकारी संख्या और विवरण
कुल फंसे हुए जहाज़ 800 से अधिक
तेल टैंकरों की संख्या 426
गैस टैंकरों की संख्या 53
फंसे हुए कुल नाविक लगभग 20,000
समझौते की समय सीमा 14 दिन का संघर्ष विराम

गल्फ देशों में काम करने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि तेल और गैस की सप्लाई में देरी होने से दैनिक उपयोग की चीजों पर असर पड़ सकता है। फिलहाल 10 अप्रैल को पाकिस्तान में ईरान और अमेरिका के बीच इस मुद्दे पर फिर से बातचीत होने की उम्मीद है।