ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। मेहर न्यूज़ एजेंसी की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, करीब 400 जहाज ईरान की अनुमति का इंतज़ार कर रहे हैं। इनमें तेल के टैंकर और व्यापारिक जहाज शामिल हैं जो Hormuz और Qeshm द्वीपों के पास खड़े हैं। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह केवल उन जहाजों को जाने देगा जो उसके खिलाफ किसी गतिविधि में शामिल नहीं हैं और सुरक्षा नियमों का पालन कर रहे हैं।

🚨: बहरीन में आसमान से गिरा मलबा, गृह मंत्रालय ने कई रास्तों पर ट्रैफिक किया डायवर्ट, लोगों के लिए चेतावनी जारी

जहाजों के लिए क्या हैं ईरान के नए नियम?

ईरान ने Strait of Hormuz से गुजरने के लिए एक नया सिस्टम शुरू किया है। इसके तहत जहाजों को अपनी मालिकी, कार्गो और यात्रा की पूरी जानकारी पहले ही Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को देनी होगी। रिपोर्ट के मुताबिक, जहाजों से ट्रांजिट फीस के नाम पर बड़ी रकम भी वसूली जा रही है। एक जानकारी के अनुसार, एक जहाज ने वहां से निकलने के लिए 2 मिलियन डॉलर का भुगतान किया। इस सख्ती की वजह से रोज़ाना होने वाला व्यापार 95% तक कम हो गया है और समुद्र में जहाजों की लंबी कतारें लग गई हैं।

दुनिया भर में इस संकट का क्या असर हो रहा है?

इस संकट का असर केवल खाड़ी देशों पर ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के व्यापार पर पड़ रहा है। ब्रिटेन इस मामले पर 35 देशों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहा है ताकि व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और सामान की आवाजाही सुनिश्चित की जा सके। वहीं बहरीन और अन्य GCC देशों ने संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को उठाया है। फिलहाल स्थिति यह है कि कई जहाज अब अफ्रीका के लंबे रास्ते से जा रहे हैं जिससे समय और पैसा दोनों ज्यादा खर्च हो रहा है।

मुख्य बिंदु विवरण
फंसे हुए जहाज 400 मालवाहक और तेल टैंकर
व्यापार में गिरावट सामान्य से 95% कम आवाजाही
फंसे हुए नाविक लगभग 20,000 से ज्यादा सेफर्स फंसे हैं
वैकल्पिक रास्ता Cape of Good Hope का इस्तेमाल हो रहा है
ताज़ा हमले अब तक 24 जहाजों को निशाना बनाया गया है

ईरान की सेना ने स्पष्ट किया है कि यह जलमार्ग उनके पूर्ण नियंत्रण में है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और व्यापारियों के लिए यह स्थिति मुश्किल पैदा कर सकती है क्योंकि इससे ज़रूरी सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी होने की संभावना है। सऊदी अरब और यूएई जैसे देश भी स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम कर रहे हैं।