स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में चल रहा तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के युद्धविराम (Ceasefire) का ऐलान तो हो गया है, लेकिन इसके बावजूद समुद्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुकी हुई है। इस रुकावट से पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल और गैस की सप्लाई को लेकर बड़ी चिंता पैदा हो गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां से भारत आने वाले सामानों पर भी इसका सीधा असर पड़ सकता है क्योंकि यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता है।

सीजफायर के बाद भी आखिर क्यों रुका है व्यापार?

ईरान और अमेरिका के बीच समझौता होने के बाद भी समुद्री रास्ते पर हालात सामान्य नहीं हुए हैं। ईरान की सेना (IRGC) ने अब यहां नए नियम लागू कर दिए हैं, जिससे जहाजों का निकलना मुश्किल हो गया है। पहले जहाँ इस रास्ते से हर दिन करीब 130 से 140 जहाज निकलते थे, वहीं अब पिछले 24 घंटों में सिर्फ 6 से 10 जहाज ही पार हो पाए हैं। इनमें से भी ज्यादातर जहाज ईरान से ही जुड़े हुए थे। आम तौर पर सुरक्षित माने जाने वाले इस रास्ते पर अब सन्नाटा पसरा हुआ है।

ईरान के नए नियम और जहाजों के लिए जारी जरूरी शर्तें

ईरान ने एक 10 सूत्रीय योजना पेश की है, जिसके तहत वह इस जलडमरूमध्य पर अपना पूरा कंट्रोल रखना चाहता है। शिपिंग कंपनियों के लिए अब यहां से गुजरना किसी चुनौती से कम नहीं है।

  • ईरान ने अब एक दिन में केवल 15 जहाजों को निकलने की सीमा तय कर दी है।
  • जहाजों को पार होने के लिए पहले ईरान की सेना (IRGC) से मंजूरी लेना अनिवार्य है।
  • जहाजों को ईरान की समुद्री सीमा के पास लारक आइलैंड के पास वाले खास रूट से जाना होगा।
  • शिपिंग कंपनियां जैसे Maersk और Hapag-Lloyd अभी भी सुरक्षा जोखिमों के कारण अपने जहाज भेजने से बच रही हैं।
  • UAE की तेल कंपनी ADNOC समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने इस रास्ते को तुरंत और बिना शर्त खोलने की मांग की है।

मौजूदा हालात और ताजा आंकड़ों की जानकारी

पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और 10 अप्रैल से इस्लामाबाद में बातचीत शुरू होने वाली है। हालांकि, जमीन पर अभी भी तनाव बरकरार है।

विवरण ताजा आंकड़े / जानकारी
सामान्य ट्रैफिक 130-140 जहाज प्रतिदिन
मौजूदा ट्रैफिक 6-10 जहाज प्रतिदिन
ईरान की नई सीमा 15 जहाज प्रतिदिन (मंजूरी के बाद)
सीजफायर की अवधि दो सप्ताह (7-8 अप्रैल से शुरू)
बातचीत का केंद्र इस्लामाबाद, पाकिस्तान
प्रमुख मांग समुद्री रास्ते का सुरक्षित संचालन