हार्मज जलडमरूमध्य में थमी जहाजों की आवाजाही, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से बढ़ गई मुश्किलें.

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे तौर पर समंदर के रास्ते होने वाले व्यापार पर दिखने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। ओमान ऑब्जर्वर की रिपोर्ट के मुताबिक, 19 अगस्त 2026 को इस रास्ते से सिर्फ छह कमोडिटी वेसल यानी मालवाहक जहाज ही गुजर सके। इससे एक दिन पहले यानी सोमवार को यह आंकड़ा नौ जहाजों का था, जबकि पिछले 10 दिनों का औसत 11 जहाजों का था। इस स्थिति से साफ पता चलता है कि पानी के इस अहम रास्ते पर खतरा मंडरा रहा है और व्यापारी अब इस रूट का इस्तेमाल करने से बच रहे हैं।
तनाव और सुरक्षा को लेकर दोनों तरफ से अलग-अलग दावे
इस रास्ते की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का कहना है कि Strait of Hormuz पूरी तरह से खुला हुआ है और वहां से बारूदी सुरंगे हटा दी गई हैं। उन्होंने यह भी साफ किया है कि ईरान के साथ फिलहाल कोई बातचीत तय नहीं है। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबिफ का कहना है कि जब तक अमेरिका जून के अंतरिम समझौते की शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक यह जलमार्ग बंद रहेगा। ईरान की मांग है कि अमेरिका नौकायन की नाकाबंदी हटाए, प्रतिबंधों को खत्म करे, ईरान की जमी हुई संपत्ति को वापस करे और सैन्य धमकियों को रोके। इस मामले में कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसका कहना है कि ईरान और ओमान के बीच समझौता होना बहुत जरूरी है।
समुद्र में हमले और यूएई का बड़ा फैसला
सुरक्षा के हालात उस समय और ज्यादा बिगड़ गए जब ब्रिटिश सेना ने जानकारी दी कि जलडमरूमध्य में एक कमर्शियल जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई और जहाज के इंजन रूम को भारी नुकसान पहुंचा। इन तमाम खतरों को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान के साथ अपने सभी व्यापारिक और वित्तीय लेन-देन को अगले आदेश तक के लिए निलंबित कर दिया है। यूएई ने यह कदम तब उठाया जब उनके समुद्री इलाके में ईरान की तरफ से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलें आकर गिरीं। रॉयटर्स को दिए गए एक इंटरव्यू में एक सीनियर ईरानी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि अगर कूटनीति विफल होती है, तो ईरान अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी तोड़ने के लिए पूरी तरह से आक्रामक रुख अपनाने को तैयार है।
ओमान के रास्ते का ले रहे हैं सहारा
इन तमाम जोखिमों और हमलों के डर से अब करीब 80 प्रतिशत जहाज संभावित ईरानी नियंत्रण वाले क्षेत्रों से बचने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) द्वारा अधिकृत ओमान के रूट का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस संकट की वजह से खाड़ी देशों में काम करने वाले प्रवासियों और वहां की अर्थव्यवस्था पर भी चिंता के बादल मंडराने लगे हैं। इस स्थिति पर नजर रखने वाले अधिकारियों का कहना है कि जब तक दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बात नहीं बनती, तब तक हालात सामान्य होना मुश्किल है।