Strait of Hormuz में समुद्री जहाजों की सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव बढ़ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय देशों से इस जलमार्ग में सैन्य अभियान चलाने के लिए सहयोग मांगा था जिसे यूरोपीय नेताओं ने आधिकारिक रूप से ठुकरा दिया है। इसी बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्छी ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि यह रास्ता सभी के लिए खुला है लेकिन ईरान के दुश्मनों के लिए इसे पूरी तरह बंद रखा जाएगा। यह स्थिति खाड़ी देशों में व्यापार करने वाले देशों के लिए चिंता का विषय बन गई है।
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यूरोपीय देशों ने अमेरिका की मांग को क्यों ठुकराया?
यूरोपीय संघ के प्रमुख देशों ने अमेरिका के साथ सैन्य अभियान में शामिल होने से मना कर दिया है। इसके पीछे कई मुख्य कारण सामने आए हैं जो अंतरराष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित कर रहे हैं।
- यूरोपीय नेता अमेरिका के सैन्य कमांड के तहत काम करने के बजाय अपना खुद का स्वतंत्र निगरानी मिशन बनाना चाहते हैं।
- फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों का मानना है कि सीधे सैन्य अभियान से क्षेत्र में तनाव और ज्यादा बढ़ सकता है।
- यूरोप का मकसद जहाजों की सुरक्षा करना है न कि किसी युद्ध जैसी स्थिति का हिस्सा बनना।
- इस फैसले से अमेरिका और उसके यूरोपीय सहयोगियों के बीच सुरक्षा नीतियों को लेकर बड़ा मतभेद सामने आया है।
व्यापार और सामान्य जनजीवन पर क्या होगा इसका असर?
Strait of Hormuz दुनिया का वह महत्वपूर्ण रास्ता है जहाँ से तेल के टैंकर और बड़े व्यापारिक जहाज गुजरते हैं। ईरान की नई नीति और अमेरिका-यूरोप के बीच के इस विवाद से समुद्री व्यापार पर सीधा असर पड़ने की संभावना है।
ईरान ने स्पष्ट किया है कि रास्ता तकनीकी रूप से खुला है लेकिन दुश्मनों के लिए नियम कड़े होंगे। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों ने अब कमर्शियल जहाजों के लिए इंश्योरेंस और सुरक्षा प्रोटोकॉल को अपडेट करना शुरू कर दिया है। खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी और विशेषकर भारतीय समुदाय के लिए यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समुद्री मार्ग खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था की लाइफलाइन माना जाता है। फिलहाल समुद्री यातायात जारी है लेकिन नौसैनिक जहाजों के लिए नए नियम लागू हो गए हैं।
