ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब समुद्री व्यापारिक रास्तों पर दिखने लगा है। इज़राइल के पूर्व प्रवक्ता Eylon Levy ने एक साक्षात्कार में कहा है कि भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEEC) की सफलता के लिए Strait of Hormuz में ईरान के सैन्य खतरों को खत्म करना बहुत जरूरी है। उन्होंने ज़ोर दिया कि भारत के साथ साझा समृद्धि और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए समुद्री रास्तों का सुरक्षित रहना आवश्यक है। इस बीच ईरान ने समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों के लिए नए और कड़े नियम लागू कर दिए हैं।

ℹ: UAE एयर डिफेंस ने ईरान से आए 9 ड्रोन को मार गिराया, हमलों में भारतीयों समेत 166 लोग हुए घायल

Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाजों के लिए क्या है नए नियम?

ईरान के रक्षा परिषद ने साफ कर दिया है कि Strait of Hormuz से गुजरने वाले गैर-हस्तक्षेप वाले जहाजों को अब ईरानी अधिकारियों के साथ पहले तालमेल बिठाना होगा। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसके ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर कोई हमला होता है, तो वह इस समुद्री रास्ते को पूरी तरह बंद कर देगा। हाल के घटनाक्रमों पर एक नज़र डालें:

  • 25 मार्च 2026 को कराची जा रहे व्यापारिक जहाज SELEN को ईरानी नौसेना ने बिना अनुमति के प्रवेश करने पर वापस लौटा दिया।
  • ईरान ने घोषणा की है कि यह रास्ता केवल उन जहाजों के लिए खुला है जो उसके दुश्मनों से जुड़े नहीं हैं।
  • ईरानी नौसेना कमांडर ने अमेरिकी युद्धपोत USS Abraham Lincoln को निशाना बनाने की चेतावनी भी दी है।
  • 20 से अधिक देशों ने ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर किए जा रहे हमलों और समुद्री रास्ता रोकने की कोशिशों की निंदा की है।

भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा पर क्या है अपडेट?

भारत सरकार इस पूरे मामले पर अपनी नज़र बनाए हुए है क्योंकि यह रास्ता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारतीय नौवहन मंत्रालय ने 25 मार्च 2026 को स्थिति स्पष्ट करते हुए कुछ अहम जानकारी साझा की है।

विवरण ताजा स्थिति
भारतीय जहाजों की संख्या 20 जहाज वर्तमान में फारस की खाड़ी में हैं।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा लगभग 540 नाविक सुरक्षित हैं और कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है।
मंत्रालय की निगरानी पिछले 24 घंटों में किसी भी भारतीय जहाज के साथ कोई समस्या नहीं आई है।

क्षेत्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय देशों का रुख

अमेरिका ने ईरान की माइन-बिछाने वाली 44 नौकाओं को नष्ट कर दिया है ताकि जहाजों के रास्ते को सुरक्षित रखा जा सके। अमेरिका ने पाकिस्तान के माध्यम से ईरान को एक 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भी भेजा था, जिसे ईरान ने खारिज कर दिया। इज़राइल का मानना है कि ईरान जानबूझकर आर्थिक गलियारे (IMEEC) के काम में बाधा डालना चाहता है। यूएई, ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता को बनाए रखने की मांग की है। इस तनाव के कारण वैश्विक तेल शिपमेंट पर भी असर पड़ने की संभावना बनी हुई है।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.