Strait of Hormuz में बढ़ते तनाव और अमेरिका की नाकेबंदी की वजह से कराची पोर्ट पर करीब 3,000 कंटेनर फंस गए हैं। यह सामान ईरान जाने वाला था, लेकिन समुद्री रास्ता मुश्किल होने के कारण अब इन्हें जमीन के रास्ते भेजने की तैयारी की गई है। इस स्थिति का असर पूरे इलाके के व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ रहा है।
पाकिस्तान ने जमीन के रास्ते माल भेजने का क्या प्लान बनाया है?
पाकिस्तान ने ईरान के साथ मिलकर एक नया जमीनी रास्ता (Transit Corridor) औपचारिक रूप से शुरू किया है। नेशनल लॉजिस्टिक कॉर्पोरेशन (NLC) ने गब्द-रिमदान सीमा टर्मिनल को अंतरराष्ट्रीय सड़क परिवहन के लिए चालू कर दिया है। 13 अप्रैल 2026 को जमी हुई मांस की पहली खेप इसी रास्ते से उज्बेकिस्तान के ताशकंद भेजी गई। इस नए मार्ग का उद्देश्य समय और लागत को कम करना है ताकि अफगानिस्तान वाले रास्ते पर होने वाली देरी और झड़पों से बचा जा सके।
Strait of Hormuz में तनाव और अमेरिकी नाकेबंदी का क्या असर है?
अमेरिका ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए समुद्री नाकेबंदी लागू की है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 17 अप्रैल 2026 को कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर प्रतिबंध सख्ती से लागू रहेंगे। दूसरी तरफ, ईरान की IRGC ने चेतावनी जारी की है और कुछ जहाजों पर हमले भी किए हैं। ईरान ने धमकी दी है कि अगर नाकेबंदी जारी रही, तो वह खाड़ी क्षेत्र के पूरे व्यापार को बाधित कर देगा। हालांकि, पाकिस्तान के कुछ जहाजों को कुवैत और UAE जाने की अनुमति मिली है।
ईरान अब जहाजों से किस तरह का शुल्क ले रहा है?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान अब Strait of Hormuz से सुरक्षित रास्ता देने के लिए चीनी युआन और बिटकॉइन जैसे स्टेबलकॉइन में टोल टैक्स ले रहा है। एक जहाज के लिए यह शुल्क 2 मिलियन डॉलर तक हो सकता है। यह व्यवस्था केवल उन देशों के जहाजों के लिए है जिन्हें ईरान अपना दुश्मन नहीं मानता, जैसे कि भारत और चीन। ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने इस टोल वसूली को औपचारिक बनाने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दे दी है।
