होरमुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका और ईरान के बीच फिर से तनाव बढ़ गया है, जिससे पूरी दुनिया में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ गई है। 15 जुलाई 2026 तक की स्थिति के अनुसार, दोनों देशों के बीच सैन्य विवाद ने ग्लोबल मार्केट को हिला दिया है। पिछले महीने हुए शांति समझौते के टूटने के बाद, हालात एक बार फिर बिगड़ गए हैं और इसका असर गल्फ देशों में रहने वाले प्रवासियों और तेल आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है।
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हमले और बढ़ता संकट
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने इस इलाके को बंद करने की चेतावनी दी है और बहरीन व कुवैत के हथियारों के ठिकानों को निशाना बनाया है। इस दौरान, ओमान के पानी में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों पर ईरानी क्रूज मिसाइल से हमला किया गया, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई और आठ अन्य लोग घायल हुए। अमेरिका ने पहले ही अपने नौसैनिक बलों के जरिए ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी कर दी है, जिसके जवाब में ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर मिसाइलें दागीं।
शिपिंग पर बुरा असर
इस टकराव के कारण समुद्री यातायात पर बहुत बुरा असर पड़ा है। डेटा के अनुसार, इस इलाके से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या घटकर महज 14 रह गई है, जबकि सामान्य तौर पर यहाँ हर दिन 130 से अधिक टैंकर गुजरते थे। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव Antonio Guterres ने इस स्थिति को खतरनाक बताते हुए सभी देशों से बातचीत के जरिए मामला सुलझाने की अपील की है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव जारी रहा, तो तेल की सप्लाई रुक सकती है, जिससे आने वाले समय में पेट्रोल और अन्य जरूरी चीजों की कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी हो सकती है।
