होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में तनाव की वजह से समुद्री यातायात पूरी तरह से ठप हो गया है। 16 जुलाई 2026 को इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते से केवल तीन जहाज ही गुजर पाए, जो सामान्य दिनों की तुलना में 2% से भी कम है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव के कारण यह स्थिति पैदा हुई है और 28 फरवरी 2026 से ही यहाँ कमर्शियल शिपिंग पर बुरा असर पड़ा है।
तनाव और नाकेबंदी का असर
अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर फिर से नौसैनिक नाकेबंदी लागू कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी कि 15 जुलाई को एक बड़े टैंकर M/T Belma को चेतावनी के बाद भी नहीं रुकने पर रोक दिया गया। हाल के दिनों में अमेरिका ने ईरान के रक्षा सिस्टम, मिसाइल ठिकानों और तटीय रक्षा प्रणालियों पर लगातार हमले किए हैं। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। इस संघर्ष में सात लोग ईरान के बंदर-ए-खामिर ब्रिज पर हुए हमले में मारे गए हैं, जबकि हालिया हमलों में दो भारतीय नाविकों की भी जान गई है।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर खतरा
इस संकट के कारण दुनिया भर में ईंधन की कीमतों पर असर पड़ा है। Brent Crude की कीमतों में इस हफ्ते 11 से 12% तक का उछाल आया है और यह लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के प्रमुख Fatih Birol ने चेतावनी दी है कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा अब गंभीर खतरे में है। इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गेनाइजेशन (IMO) के महासचिव Arsenio Dominguez ने भी शिपिंग में आई भारी कमी की पुष्टि की है और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है। भारत सरकार ने भी हालात को देखते हुए अपने नाविकों को इस रास्ते पर जाने से मना किया है।
