Strait of Hormuz Update: ब्रिटेन ने जारी की चेतावनी, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और अरब सागर में खतरा बढ़ा, भारतीय जहाज़ों पर भी हुआ हमला

ब्रिटेन की समुद्री संस्था UKMTO ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य और अरब सागर में खतरे के स्तर को ‘क्रिटिकल’ यानी बेहद गंभीर बताया है। इस इलाके में तनाव इतना बढ़ गया है कि अब जहाज़ों का आना-जाना लगभग बंद हो गया है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही खींचतान का असर अब पूरी दुनिया के समुद्री व्यापार पर दिख रहा है और भारतीय जहाज़ भी इसकी चपेट में आए हैं।

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समुद्र में क्या हुआ और हालात क्यों बिगड़े?

ब्रिटेन की UKMTO संस्था ने बताया कि 18 अप्रैल 2026 को ओमान के उत्तर-पूर्व में कई हमले हुए। एक कंटेनर जहाज़ पर किसी अज्ञात मिसाइल से हमला हुआ, जबकि दो ईरानी गार्ड्स की नावों ने एक टैंकर पर फायरिंग की। यहाँ तक कि एक क्रूज जहाज़ के पास भी पानी में कुछ गिरने की आवाज़ सुनाई दी। इस डर की वजह से समुद्री ट्रैफिक एकदम से गिर गया है, जहाँ पहले दिन में 138 जहाज़ निकलते थे, अब वह संख्या शून्य पर पहुँच गई है।

ईरान और अमेरिका के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या है?

यह सारा विवाद अमेरिका द्वारा ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी करने से शुरू हुआ, जो 13 अप्रैल 2026 से लागू है। अमेरिका की CENTCOM ने बताया कि उन्होंने अब तक 23 जहाज़ों को वापस मोड़ा है। इसके जवाब में ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका उसकी नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक कोई भी जहाज़ बिना इजाजत यहाँ से नहीं गुज़र पाएगा, वरना उन्हें दुश्मन मानकर निशाना बनाया जाएगा।

भारत और अन्य देशों पर इसका क्या असर पड़ा?

इस तनाव के बीच भारत के दो जहाज़ों पर फायरिंग की खबरें आई हैं। इस घटना के बाद भारत सरकार ने ईरान के राजदूत को तलब किया और अपने जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही की मांग की। वहीं, JMIC ने अपनी लिस्ट में बदलाव किया है और अब कच्चे तेल, रिफाइंड उत्पादों और लुब्रिकेंट्स को भी प्रतिबंधित सामान की श्रेणी में डाल दिया है।

संस्था/देश ताज़ा स्थिति और कार्रवाई
UKMTO (ब्रिटेन) खतरे का स्तर ‘क्रिटिकल’ घोषित किया
CENTCOM (अमेरिका) 13 अप्रैल से नाकेबंदी शुरू, 23 जहाज़ मोड़े
ईरान बिना अनुमति गुज़रने वाले जहाज़ों को निशाना बनाने की चेतावनी
भारत ईरानी राजदूत को बुलाकर सुरक्षित रास्ते की मांग की
JMIC कच्चे तेल और लुब्रिकेंट्स को प्रतिबंधित लिस्ट में जोड़ा
समुद्री ट्रैफिक 138 जहाज़ों से घटकर शून्य पर पहुँचा