अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब चरम पर पहुँच गया है। राष्ट्रपति Donald Trump ने Strait of Hormuz में नौसैनिक नाकाबंदी का आदेश दिया है, जो 13 अप्रैल 2026 की सुबह 10 बजे से लागू हो चुकी है। इस बड़े फैसले के बाद दुनिया भर के बाजारों में हलचल मच गई है और European Commission ने इसे ग्लोबल इकोनॉमी के लिए एक बड़ा खतरा बताया है।

अमेरिका ने नाकाबंदी क्यों की और इसका क्या असर होगा?

अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई बातचीत विफल रही, जिसके बाद राष्ट्रपति Trump ने यह कड़ा कदम उठाया। यह नाकाबंदी मुख्य रूप से ईरान के बंदरगाहों और तटीय क्षेत्रों में आने-जाने वाले जहाजों के लिए की गई है। EU की प्रेसिडेंट Ursula von der Leyen ने कहा कि इस रुकावट से ग्लोबल सप्लाई चेन को भारी नुकसान हो रहा है। उनके मुताबिक, ईरान में युद्ध शुरू होने के बाद से यूरोप में ईंधन आयात की लागत में करीब 22 बिलियन यूरो की बढ़ोतरी हुई है।

ईरान और अन्य देशों की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?

ईरान ने अमेरिका के इस कदम को पूरी तरह अवैध और समुद्री डकैती करार दिया है। ईरान के नौसेना कमांडर ने इस धमकी को मजाक बताया है और चेतावनी दी है कि अगर उनके बंदरगाहों को खतरा हुआ, तो खाड़ी या ओमान की खाड़ी का कोई भी पोर्ट सुरक्षित नहीं रहेगा। वहीं, अन्य देशों की स्थिति इस प्रकार है:

  • NATO सहयोगी: इन्होंने अमेरिकी नाकाबंदी में हिस्सा लेने से साफ मना कर दिया है।
  • रूस: क्रेमलिन ने चेतावनी दी है कि इस फैसले से वैश्विक व्यापार बाजारों पर बुरा असर पड़ेगा।
  • फ्रांस और ब्रिटेन: ये दोनों देश स्थिति को सुधारने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस आयोजित करेंगे।

क्या जहाजों को रास्ता पाने के लिए टोल देना होगा?

ईरान ने Strait of Hormuz से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने का प्रस्ताव रखा था ताकि पुनर्निर्माण के लिए फंड जुटाया जा सके। हालांकि, European Union ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है। EU का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जहाजों का आना-जाना एक सार्वजनिक सेवा है और इसके लिए किसी भी तरह का भुगतान या टोल नहीं लिया जाना चाहिए। फिलहाल, US Central Command ने कहा है कि जो जहाज ईरान के अलावा अन्य गंतव्यों की ओर जा रहे हैं, उन्हें रास्ता दिया जाएगा।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.