Al Jazeera ने एक विजुअल गाइड जारी की है जिसमें Strait of Hormuz में बिछाए गए समुद्री बारूद (mines) को हटाने के खतरनाक काम के बारे में बताया गया है. यह काम बहुत धीमा है और इसमें जान का बड़ा जोखिम है. अमेरिका और ईरान के बीच हुए एक समझौते के बाद अब इस समुद्री रास्ते को फिर से खोलने की कोशिश की जा रही है ताकि जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो सके.
अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता
जून 2026 के आखिरी हफ्ते में अमेरिका और ईरान के बीच एक ढांचागत समझौता हुआ है. इस समझौते का मकसद ईरान पर चल रहे अमेरिका और इसराइल के युद्ध को खत्म करना और Strait of Hormuz को फिर से खोलना है. इस डील के तहत ईरान को 30 दिनों के भीतर समंदर में बिछाए गए सभी बारूद को हटाना होगा. इससे पहले 18 जून 2026 को अमेरिकी नौसेना ने जहाजों की नाकाबंदी हटा ली थी, क्योंकि दोनों देशों के बीच 60 दिनों के लिए युद्धविराम (ceasefire) तय हुआ था.
अभी भी समंदर में मौजूद हैं खतरे
UN की इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) ने 26 जून 2026 को बताया कि शिपिंग रूट पर अभी भी लगभग 80 बारूद मौजूद हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ट्रैफिक को पहले जैसा करने में 40 से 50 दिन का समय लग सकता है. समंदर के बारूद को हटाना जमीन के बारूद की तुलना में ज़्यादा मुश्किल होता है क्योंकि लहरों की वजह से ये अपनी जगह बदलते रहते हैं.
बचाव के लिए अंतरराष्ट्रीय मदद
बारूद हटाने के काम में फ्रांस और ब्रिटेन नेतृत्व कर रहे हैं. उनके साथ जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा जैसे देश भी मदद कर रहे हैं. इस काम के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जैसे:
- सोनार से लैस अंडरवॉटर ड्रोन
- रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROV)
बता दें कि ईरान ने Maham 3 और Maham 7 जैसे बारूद बिछाए हैं, जिन्हें सोनार तरंगों की मदद से पहचानना बहुत मुश्किल होता है. फिलहाल Strait of Hormuz में चार ऐसे इलाके हैं जहां बारूद होने का शक है.
कड़े नियम और विवाद
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 अप्रैल 2026 को आदेश दिया था कि जो भी जहाज बारूद बिछाते हुए पकड़ा जाए उसे तुरंत मार गिराया जाए. डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने साफ किया कि अगर अमेरिकी जहाजों या फोर्स को खतरा हुआ तो उन्हें नष्ट करने के आदेश हैं. वहीं, ईरान की IRGC ने कमर्शियल जहाजों को चेतावनी दी है कि वे केवल तेहरान द्वारा बताए गए रास्तों का ही इस्तेमाल करें. ओमान ने अपने बनाए रूट का बचाव करते हुए कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से सुरक्षित है, लेकिन 25 जून को इस रूट पर एक जहाज पर हमला हुआ, जिसके बाद IMO ने फंसे हुए जहाजों को निकालने का प्लान कैंसिल कर दिया.
