Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत चल रही है। कतर और पाकिस्तान इस बातचीत में बीच-बचाव कर रहे हैं, ताकि इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को सुरक्षित बनाया जा सके। जून 2026 में हुए एक शुरुआती समझौते के बाद अब दोनों देश तकनीकी स्तर पर चर्चा कर रहे हैं।

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दोहा में हुई अहम बैठक और बड़े अधिकारियों की मौजूदगी

1 जुलाई 2026 को कतर के दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी बातचीत हुई। इस मीटिंग का मुख्य उद्देश्य एक स्थायी युद्धविराम सुनिश्चित करना और जहाजों के आने-जाने के रास्ते को तय करना था। अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance ने संकेत दिया कि बातचीत में काफी प्रगति हुई है, हालांकि अभी तक किसी अंतिम समाधान तक नहीं पहुँचा गया है।

इन चर्चाओं में अमेरिका की तरफ से Jared Kushner और Steve Witkoff शामिल रहे, जबकि ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष Mohammad Baqer Qalibaf और उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने हिस्सा लिया। इसके अलावा, अमेरिका के विदेश मंत्री Marco Rubio और जर्मनी के विदेश मंत्री Johann Wadephul ने भी सुरक्षित पारगमन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई है।

ओमान का प्रस्ताव और टोल फीस पर विवाद

ओमान ने समुद्री रास्ते के प्रबंधन के लिए एक नया ढांचा प्रस्तावित किया है। ओमान का सुझाव है कि सुरक्षा और पर्यावरण की रक्षा के लिए जहाजों से सर्विस फीस ली जाए। हालांकि, अमेरिका और पश्चिमी देशों ने इस बात का विरोध किया है। अमेरिका का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर कोई भी देश टोल लगाने या नेविगेशन को रोकने का अधिकार नहीं रखता।

दूसरी ओर, ईरान ने अपनी बात पर जोर दिया है कि वह इस रास्ते पर अपना नियंत्रण चाहता है। ईरान का कहना है कि जहाजों को उसके द्वारा निर्धारित Route of Authority का पालन करना होगा। ईरान ने यह भी चेतावनी दी है कि वह अपने अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए ज़रूरत पड़ने पर बल का प्रयोग भी कर सकता है।

समझौते की शर्तें और सुरक्षा चेतावनी

जून 2026 में 14 बिंदुओं वाला एक समझौता (MOU) साइन किया गया था। इस समझौते के तहत युद्धविराम करने और Strait of Hormuz को फिर से खोलने की बात कही गई थी। इसमें यह तय हुआ था कि हस्ताक्षर के बाद केवल 60 दिनों के लिए यह रास्ता टोल-फ्री रहेगा।

  • ईरान का रुख: ईरान ने साफ किया कि वह रास्ते से बारूदी सुरंगें हटाने (demining) का काम खुद करेगा और इसमें बाहरी देशों, खासकर फ्रांस का हस्तक्षेप नहीं चाहता।
  • IMO की प्रतिक्रिया: अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के महासचिव Arsenio Dominguez ने युद्धविराम को सुरक्षा की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है।
  • सुरक्षा जोखिम: Joint Maritime Information Center (JMIC) ने इस क्षेत्र में सुरक्षा खतरे के स्तर को “substantial” यानी काफी अधिक बताया है।

BIMCO और INTERTANKO जैसी संस्थाओं ने जहाजों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। उनका कहना है कि अमेरिका और ईरान के बयानों में स्पष्टता की कमी है, जिससे सुरक्षा स्थिति अभी भी अस्थिर बनी हुई है। INTERTANKO ने अपने सदस्यों को सलाह दी है कि यदि संभव हो तो इस रास्ते से गुजरने में देरी करें और अमेरिकी नौसेना के साथ तालमेल बिठाएं।