स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका और ईरान की चल रही है बयानबाजी, पूर्व राजनयिक ने खोले बड़े राज.

दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्तों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के ताजा हालात को लेकर बड़ा बयान सामने आया है। अमेरिका के पूर्व राजनयिक जोई हुड ने साफ किया है कि इस जलमार्ग की स्थिति को लेकर न तो अमेरिका पूरी सच्चाई बता रहा है और न ही ईरान सही जानकारी दे रहा है। दोनों देशों की तरफ से लगातार दावे किए जा रहे हैं, लेकिन मैदानी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। आम लोगों और इस रास्ते से सफर करने वालों के मन में लगातार डर का माहौल बना हुआ है, क्योंकि इस क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के दावों में कितना है दम
पूर्व राजनयिक जोई हुड ने जानकारी दी कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर यह दावा करते हैं कि होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह से खुला हुआ है। हालांकि, उनका यह दावा पूरी तरह से सही नहीं माना जा सकता है। दूसरी तरफ, ईरान का यह कहना भी पूरी तरह से सच नहीं है कि उन्होंने इस रास्ते को पूरी तरह से बंद कर दिया है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, हुड ने बताया कि ईरान के पास इस बड़े जलमार्ग को पूरी तरह से बंद करने के लिए जरूरी सैन्य साधन और ताकत मौजूद नहीं है। यह कोई सड़क या हाईवे जैसा नहीं है जहां कोई गेट लगा दिया जाए या बैरिकेड लगाकर आवाजाही रोक दी जाए। ईरान इस इलाके में सिर्फ अपना दबाव बनाने के लिए बिना हथियारों वाले कमर्शियल जहाजों को पहले धमकाता है और फिर उन पर मिसाइलें दागने की कार्रवाई करता है.
समुद्र में जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा के उपाय
तनाव के इस माहौल में समुद्री व्यापार करने वाले जहाज अपनी जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे हैं। कुछ जहाज अपनी पहचान छिपाने के लिए अपने ट्रांसपोंडर बंद कर लेते हैं और केवल रात के समय यात्रा करना पसंद करते हैं। ऐसे जहाज आमतौर पर ओमान के तट के बहुत करीब से होकर गुजरते हैं। अमेरिकी सेना अपने पास उपलब्ध संसाधनों और जहाजों के जरिए इनकी सुरक्षा करने की लगातार कोशिश कर रही है। इस बीच, ईरान के उप विदेशमंत्री काजिम गरीबाबादी ने एक बयान में कहा कि ओमान के साथ एक अस्थायी ट्रांजिट समझौता होने के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य असल में बंद है। उनका कहना है कि इस रास्ते को पूरी तरह से खोलने से पहले वाशिंगटन को समझौता ज्ञापन यानी एमओयू के तहत किए गए अपने सभी वादों को जमीन पर उतारना होगा।
ओमान की खाड़ी में तेल ट्रांसफर के मामले आए सामने
एक तरफ जहां कूटनीतिक स्तर पर बयानबाजी चल रही है, वहीं दूसरी तरफ समंदर में गतिविधियों का दौर भी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि जलडमरूमध्य के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र से सभी बारूदी सुरंगें यानी माइंस को हटाकर नष्ट कर दिया गया है। साथ ही तेहरान को सख्त चेतावनी दी गई है कि यदि किसी भी जहाज ने दोबारा नई बारूदी सुरंगें बिछाने की कोशिश की, तो उसे तुरंत नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। उधर, वेसल ट्रैकिंग सर्विस यानी टैंकर ट्रैक्र्स डॉट कॉम के आंकड़ों के मुताबिक, ओमान की खाड़ी में जहाज से जहाज यानी एसटीएस ट्रांसफर के कम से कम 20 मामले सामने आए हैं। इस प्रक्रिया में समुद्र के बीचोंबीच एक बड़े जहाज से दूसरे जहाज में सीधे कार्गो या तेल पंप किया जाता है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से कार्गो के मूल स्थान को छिपाने के लिए किया जाता है ताकि प्रतिबंधों या ज्यादा जोखिम वाले इलाकों के बंदरगाहों पर जाने से बचा जा सके.
कच्चे तेल के व्यापार पर मंडराता खतरा
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए कंपनी ने जानकारी दी कि ईरान को छोड़कर इस क्षेत्र के लगभग हर देश से आने वाले 25 मिलियन बैरल कच्चे तेल और अन्य रिफाइंड उत्पादों का पूरा हिसाब रखा गया है। इसके बाद टैंकर ट्रैकर्स ने यह भी बताया कि उन्होंने पांच और ऐसे मामलों की पहचान की है, जिनमें ईरान की लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस यानी एलपीजी का मामला भी शामिल है। इन तमाम गतिविधियों को देखते हुए यह साफ हो गया है कि ओमान की खाड़ी अब एसटीएस ट्रांसफर के लिए एक बहुत बड़ा केंद्र बन चुकी है। इस पूरे घटनाक्रम का असर उन तमाम लोगों पर पड़ रहा है जो इस रास्ते से जुड़े व्यापार या समुद्री यात्राओं पर निर्भर हैं। Gulf क्षेत्र में रहने वाले प्रवासियों और भारत आने-जाने वाले लोगों के लिए भी इस तरह का तनाव चिंता का विषय बनता जा रहा है, क्योंकि इससे वैश्विक बाजार में ईंधन की कीमतों पर सीधा असर पड़ता है।