Donald Trump और अमेरिका Strait of Hormuz को दोबारा खोलने के मामले में अकेले पड़ गए हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे बड़े देशों ने वहां अपने युद्धपोत भेजने से साफ़ मना कर दिया है। इस रास्ते पर फिलहाल ईरान का कब्ज़ा है और पश्चिमी देशों के जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह से बंद हो गई है। हालांकि भारत और कुछ अन्य देशों के जहाज छुपकर या खास समझौते के तहत वहां से निकल रहे हैं। इस विवाद के कारण वैश्विक व्यापार और तेल की सप्लाई पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

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Donald Trump की मांग और सहयोगी देशों का जवाब

Donald Trump ने सात देशों से मांग की थी कि वे Strait of Hormuz में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना भेजें। लेकिन UK, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान जैसे खास सहयोगी देशों ने इस मांग को तुरंत ठुकरा दिया है। अपने सहयोगियों के इस फैसले पर Donald Trump ने भारी निराशा जताई है।

Trump ने खासतौर पर ब्रिटेन की आलोचना की और कहा कि यह समर्थन न मिलना NATO के भविष्य के लिए बहुत बुरा हो सकता है। दूसरी तरफ ब्रिटेन के प्रधानमंत्री Keir Starmer ने स्पष्ट किया कि वे शांति के लिए सामूहिक योजना पर काम करेंगे लेकिन किसी भी बड़े युद्ध का हिस्सा नहीं बनेंगे। यूरोपीय संघ ने भी इस रास्ते पर अपने नौसैनिक मिशन का दायरा बढ़ाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है। हालात को देखते हुए Trump ने चीनी राष्ट्रपति के साथ होने वाली अपनी बैठक को भी टाल दिया है।

Strait of Hormuz में अभी क्या हालात हैं

पश्चिमी देशों और Maersk जैसी बड़ी शिपिंग कंपनियों के लिए यह समुद्री रास्ता लगभग बंद हो चुका है। ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि बिना इजाजत आने वाले किसी भी जहाज को तबाह कर दिया जाएगा। अमेरिका ने इसके खिलाफ ऑपरेशन Epic Fury शुरू किया है जबकि UAE को ईरान की तरफ से होने वाले अधिकतर हमलों का सामना करना पड़ रहा है।

  • समुद्री बीमा प्रीमियम में 1000% से ज्यादा का उछाल आया है।
  • Strait of Hormuz से जहाजों की आवाजाही में 90% की गिरावट दर्ज की गई है।
  • Brent Crude तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।
  • IEA ने बाजार को स्थिर करने के लिए 40 करोड़ बैरल तेल जारी करने की मंजूरी दी है।

भारतीय और अन्य जहाजों पर असर

इस भारी तनाव के बावजूद कुछ देशों के जहाज अभी भी इस रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक भारत, ग्रीस, तुर्की और इराक के कुछ जहाज अपने AIS ट्रैकर बंद करके यहां से निकल रहे हैं। कुछ मामलों में इन जहाजों की ईरान के साथ खास सहमति भी बताई जा रही है ताकि उन पर हमला न हो।

जो व्यापारिक जहाज यहां से नहीं जा पा रहे हैं उन्हें अफ्रीका के रास्ते घूमकर जाना पड़ रहा है। इस लंबे रास्ते से उनका सफर 10 से 14 दिन लंबा हो गया है और ईंधन का खर्च भी करीब 40% बढ़ गया है। इस समुद्री संकट की वजह से दुनियाभर में औद्योगिक उपकरण और रोजमर्रा के सामानों की सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित हो रही है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.