Sudan-Saudi Meeting: सूडान के अल-बुरहान पहुंचे जेद्दा, क्राउन प्रिंस के साथ की मुलाकात, सुरक्षा और स्थिरता पर हुई बात
सूडान के ट्रांजिशनल सॉवरेनिटी काउंसिल के चेयरमैन अब्देल फताह अल-बुरहान सोमवार, 20 अप्रैल 2026 को सऊदी अरब के जेद्दा पहुंचे. वहां उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान के साथ एक अहम मीटिंग की. इस मुलाकात का मुख्य मकसद सूडान में शांति बहाल करना और दोनों देशों के बीच आपसी रिश्तों को और मजबूत बनाना था.
जेद्दा मीटिंग में कौन-कौन शामिल हुआ और क्या रही चर्चा
अल-बुरहान का स्वागत जेद्दा के किंग अब्दुलअज़ीज़ इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर कई बड़े अधिकारियों ने किया. रॉयल पैलेस में हुई मीटिंग के दौरान दोनों नेताओं ने सूडान की सुरक्षा और उसकी सीमाओं की रक्षा करने पर जोर दिया. अल-बुरहान ने सऊदी अरब के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि सऊदी की सुरक्षा सूडान की स्थिरता के लिए जरूरी है. इस बातचीत में क्षेत्रीय मुद्दों और मिडिल ईस्ट की शांति पर भी चर्चा हुई.
| सऊदी अधिकारी | सूडानी अधिकारी |
|---|---|
| मोहम्मद बिन सलमान (क्राउन प्रिंस) | अब्देल फताह अल-बुरहान (चेयरमैन) |
| प्रिंस खालिद बिन सलमान (रक्षा मंत्री) | मोहियुद्दीन सलीम अहमद इब्राहिम (विदेश मंत्री) |
| प्रिंस फैसल बिन फरहान (विदेश मंत्री) | लेफ्टिनेंट जनरल अहमद इब्राहिम मुफद्दल (इंटेलिजेंस चीफ) |
| डॉ. मूसाएड अल-ऐबन (नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर) | दफल्लाह अल-हज (सऊदी में सूडान के राजदूत) |
हथियारों की डील और निवेश को लेकर क्या हुआ
इस दौरे के बीच ऐसी खबरें आई हैं कि सऊदी अरब ने पाकिस्तान और सूडान के बीच होने वाले 1.5 अरब डॉलर के हथियारों के सौदे को रुकवाया है. बताया गया कि सऊदी अरब ने इस खरीद के लिए पैसा देने से मना कर दिया, जिसके बाद पाकिस्तान ने इस एग्रीमेंट को रोक दिया. इसके अलावा, सऊदी अरब जून में एक निवेश फोरम आयोजित करने की तैयारी में है, ताकि सूडान के बैंकिंग सेक्टर और अन्य क्षेत्रों में निवेश की रुकावटों को दूर किया जा सके.
सूडान के गृहयुद्ध और अंतरराष्ट्रीय मदद का हाल
सूडान में अप्रैल 2023 से ही सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) के बीच खूनी संघर्ष चल रहा है. यह जंग अब अपने चौथे साल में पहुंच गई है. हाल ही में बर्लिन में एक कॉन्फ्रेंस हुई थी, जिसमें सूडान के लिए 1 अरब डॉलर से ज्यादा की मानवीय मदद जुटाई गई, लेकिन इसमें सूडान की सेना और RSF को शामिल नहीं किया गया था. सऊदी अरब पहले भी जेद्दा घोषणा के जरिए शांति लाने की कोशिश कर चुका है.