Sudan Crisis: उत्तरी कोर्डोफन में रैपिड सपोर्ट फोर्सेस के हमलों से भारी तबाही, हजारों लोग बेघर

सूडान के उत्तरी कोर्डोफन राज्य में हिंसा और हमलों का दौर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे आम लोगों की जिंदगी नर्क बन गई है। ताजा हमलों के बाद हजारों की संख्या में परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर अल ओबेइड शहर की तरफ भागना पड़ा है। अर्धसैनिक बल रैपिड सपोर्ट फोर्सेस यानी आरएसएफ लगातार ग्रामीण इलाकों को निशाना बना रही है, जिससे वहां डर और दहशत का माहौल पैदा हो गया है। हाल ही में हुए इन हमलों ने सूडान के मानवीय संकट को और ज्यादा गहरा कर दिया है, जहां आम जनता बुनियादी जरूरतों के लिए भी तरस रही है।
उम्म ड्रेइसा और अल-शाक्ला में तबाही
बुधवार, 20 अगस्त 2026 को आरएसएफ के लड़ाकों ने अल ओबेइड से लगभग 40 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित उम्म ड्रेइसा और अल-शाक्ला गांवों पर अचानक हमला बोल दिया। इस हिंसक हमले में कम से कम 6 लोगों की मौत हो गई और करीब 1,000 लोग यानी 215 परिवार पैदल चलकर गुरुवार दोपहर तक किसी तरह प्रांतीय राजधानी अल ओबेइड पहुंचे। इन बेघर हुए लोगों के पास खाने-पीने का सामान तक नहीं बचा है और वे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
इससे पहले पिछले हफ्ते भी इसी इलाके में ऐसा ही खूनी खेल खेला गया था। अल ओबेइड से 20 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित उम्म अर्दा गांव पर हुए हमले में 18 लोगों की जान चली गई थी, जबकि 17 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस हमले के बाद 300 से अधिक परिवारों को अपना घर छोड़कर भागना पड़ा था। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट्स के मुताबिक, केवल उम्म अर्दा इलाके में ही स्थानीय अधिकारियों ने 12 से ज्यादा नागरिकों की मौत दर्ज की है।
अस्पताल और पानी की सप्लाई ठप
अल जज़ीरा के रिपोर्टर अलमिग्दाद अल्रुहाइद ने इलाके से जानकारी देते हुए बताया कि आरएसएफ मुख्य सप्लाई रूटों पर कब्जा जमाए बैठी है। वे गांवों को पूरी तरह तबाह कर रहे हैं और सेना के वाहनों, तेल के टैंकरों और मालवाहक ट्रकों को निशाना बना रहे हैं। उत्तरी कोर्डोफन राज्य के अधिकारियों ने आरएसएफ पर नागरिकों के खिलाफ अत्याचार करने का गंभीर आरोप लगाया है। स्थिति इतनी खराब हो गई है कि आरएसएफ अल ओबेइड के जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार ड्रोन से हमले कर रही है। शहर के मुख्य बिजली ट्रांसफार्मर पर हुए हमलों के बाद से बिजली गुल है, जिससे अस्पतालों का काम-काज, पानी की सप्लाई और टेलीकॉम सेवाएं पूरी तरह से ठप हो चुकी हैं।
साल 2025 के अंत से लेकर अब तक कोर्डोफन क्षेत्र में 200,000 से ज्यादा लोग नए सिरे से बेघर हो चुके हैं। पिछले आठ महीनों में केवल शैकन जिले में विस्थापन की दर में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस समय अल ओबेइड शहर में लगभग 1.3 मिलियन यानी 13 लाख विस्थापित लोग शरण लिए हुए हैं, जिससे वहां की स्थानीय व्यवस्था और बुनियादी सेवाओं पर बहुत ज्यादा दबाव पड़ गया है।
मानवीय संकट और अंतरराष्ट्रीय अपील
अंतर्राष्ट्रीय प्रवासन संगठन यानी IOM की महानिदेशक एमी पोप ने इस बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि बेघर हो चुके परिवारों को एक साथ हिंसा, बुनियादी ढांचे के टूटने और भीषण बाढ़ जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सुरक्षा हालात ठीक न होने की वजह से अल-मज्रौब जैसे इलाकों में सहायता संगठनों को अपने काम रोकने पड़े हैं।
संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय यानी OCHA ने नागरिकों की सुरक्षा की मांग करते हुए अंतरराष्ट्रीय फंड बढ़ाने की अपील की है, क्योंकि साल 2026 की मानवीय सहायता अपील का केवल 41 प्रतिशत हिस्सा ही मिल पाया है। इस बारे में अधिक जानकारी ReliefWeb Report पर देखी जा सकती है। दूसरी तरफ, इस्लामिक रिलीफ जैसे सहायता समूहों के कार्यकर्ताओं का कहना है कि शहर में आंशिक घेराबंदी जैसे हालात हैं, जहां खाना, ईंधन और दवाइयां बहुत मुश्किल से मिल रही हैं और उनके दाम आसमान छू रहे हैं।