सऊदी अरब, कुवैत और रूस समेत ओपेक प्लस (OPEC+) के सात देशों ने मिलकर कच्चे तेल के उत्पादन को बढ़ाने का एक बड़ा फैसला लिया है। रविवार, 7 जून 2026 को हुई एक वर्चुअल बैठक में इन देशों ने जुलाई 2026 से अपने कुल तेल उत्पादन में हर दिन 1.88 लाख बैरल (188,000 bpd) की बढ़ोतरी करने पर सहमति जताई है। हालांकि, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी नाकाबंदी के कारण इस बढ़े हुए तेल को बाजार तक पहुंचाना अभी काफी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
किस देश का तेल उत्पादन कितना बढ़ेगा?
इस फैसले के तहत सभी सात देशों को अलग-अलग कोटा दिया गया है। जुलाई 2026 से होने वाली बढ़ोतरी का पूरा विवरण नीचे दी गई तालिका में देखा जा सकता है:
| देश का नाम | उत्पादन बढ़ोतरी (बैरल प्रति दिन – bpd) |
|---|---|
| सऊदी अरब | 62,000 |
| रूस | 62,000 |
| इराक | 26,000 |
| कुवैत | 16,000 |
| कजाकिस्तान | 10,000 |
| अल्जीरिया | 6,000 |
| ओमान | 5,000 |
उत्पादन बढ़ाने के फैसले के पीछे की मुख्य बातें
ओपेक प्लस देशों का यह फैसला बाजार में स्थिरता बनाए रखने और धीरे-धीरे आपूर्ति को सामान्य करने के इरादे से लिया गया है। इस फैसले से जुड़ी कुछ जरूरी बातें इस प्रकार हैं:
- यूएई के बाहर होने का असर: मई 2026 में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के ओपेक प्लस से बाहर होने के बाद तेल उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य को संशोधित किया गया था। पहले अप्रैल और मई में इसे 2,06,000 बैरल प्रति दिन बढ़ाने का लक्ष्य था, जिसे घटाकर अब 1,88,000 बैरल प्रति दिन किया गया है।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी: ईरान युद्ध की वजह से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी चल रही है। इस वजह से खाड़ी देशों से तेल का निर्यात प्रभावित हुआ है। जानकारों का कहना है कि तेल उत्पादन में यह बढ़ोतरी फिलहाल केवल कागजों पर ही ज्यादा असरदार है क्योंकि हकीकत में इस तेल को बाहर भेजना अभी मुश्किल है।
- नियमों में ढील: जिन सदस्य देशों ने तय सीमा से अधिक तेल का उत्पादन किया था, उन्हें अब इसकी भरपाई करने के लिए दिसंबर 2026 के अंत तक का समय दिया गया है।
- अगली बैठक: बाजार की स्थितियों की समीक्षा करने के लिए ये सात देश हर महीने बैठक करेंगे। इनकी अगली समीक्षा बैठक 5 जुलाई 2026 को होने वाली है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
जुलाई 2026 से ओपेक प्लस देश कितना तेल उत्पादन बढ़ाएंगे?
सात ओपेक प्लस देश जुलाई 2026 से रोजाना कुल 1,88,000 बैरल तेल का उत्पादन बढ़ाएंगे, जिसमें सबसे ज्यादा 62,000-62,000 बैरल की बढ़ोतरी सऊदी अरब और रूस की तरफ से की जाएगी।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी का तेल निर्यात पर क्या असर पड़ रहा है?
ईरान युद्ध के चलते हॉर्मुज जलडमरूमध्य में नाकाबंदी है, जिससे खाड़ी के प्रमुख देशों से तेल की शिपमेंट प्रभावित हो रही है और उत्पादन बढ़ने के बावजूद बाजार में इसकी वास्तविक आपूर्ति सीमित बनी हुई है।
