सऊदी अरब के मक्का शहर में मंगलवार, 26 मई 2026 को दोपहर 12:18 बजे एक बेहद अनोखा और दुर्लभ नजारा देखा गया। इस समय सूर्य सीधे पवित्र काबा के ठीक ऊपर आ गया। इस खास खगोलीय घटना का उपयोग दुनिया भर के लोग अपने घर बैठे किबला यानी नमाज पढ़ने की सही दिशा का पता लगाने के लिए करते हैं। जब सूरज काबा के ठीक ऊपर होता है, तो मक्का के आसपास खड़ी चीजों की परछाई लगभग गायब हो जाती है।

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किबला की सही दिशा जानने में कैसे मिलती है मदद?

इस खगोलीय घटना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसके जरिए कोई भी आम इंसान बिना किसी आधुनिक यंत्र या जटिल गणना के किबला की सटीक दिशा का पता लगा सकता है। इसके लिए नियम बहुत आसान हैं:

  • दुनिया के जिस भी हिस्से में इस समय सूरज दिखाई दे रहा हो, वहां लोग सूरज की तरफ देखकर सीधे किबला की दिशा का निर्धारण कर सकते हैं।
  • इस समय धूप में रखी किसी भी सीधी खड़ी वस्तु की परछाई पूरी तरह से गायब हो जाती है या न्यूनतम रह जाती है।
  • यह प्रक्रिया पूरी तरह प्राकृतिक है और भौगोलिक गणनाओं को जांचने का सबसे आसान तरीका मानी जाती है।

साल में केवल दो बार ही क्यों होता है ऐसा?

जेद्दा एस्ट्रोनॉमी सोसाइटी के निदेशक इंजीनियर माजिद अबू जहरा ने इस घटना की वैज्ञानिक जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इस दौरान सूर्य 89.94 डिग्री की ऊंचाई पर पहुंच गया, जो कि पूरी तरह से सीधा होने से महज 0.06 डिग्री ही कम था।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह घटना साल में केवल दो बार ही होती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी अपने अक्ष पर लगभग 23.44 डिग्री झुकी हुई है। इस झुकाव के कारण सूर्य की स्थिति कर्क और मकर रेखा के बीच बदलती रहती है। जब सूर्य इस चक्कर के दौरान काबा के अक्षांश के ठीक ऊपर आता है, तब यह दुर्लभ नजारा देखने को मिलता है। इसका वैज्ञानिक और शैक्षणिक महत्व भी बहुत अधिक है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

काबा के ऊपर सूरज आने पर किबला की दिशा कैसे पता चलती है?

इस समय दुनिया में जहां भी धूप दिख रही हो, वहां से सूरज की सीधी दिशा ही किबला की दिशा होती है। इस समय खड़ी चीजों की परछाई लगभग शून्य हो जाती है।

यह घटना साल में कितनी बार होती है?

यह घटना साल में केवल दो बार होती है। ऐसा पृथ्वी के अक्षीय झुकाव के कारण कर्क और मकर रेखा के बीच सूर्य की बदलती स्थिति की वजह से होता है।