सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट और डीपफेक जैसे साइबर अपराधों पर केंद्र सरकार को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश Surya Kant, जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस V. Mohana की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि डिजिटल अरेस्ट को एक अलग अपराध के रूप में परिभाषित किया जाना चाहिए और इसमें शामिल दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
डिजिटल अरेस्ट अब रोबरी और डकैती के बराबर
अदालत ने सुझाव दिया है कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों को रोबरी और डकैती जैसे गंभीर अपराधों की श्रेणी में रखा जाए। इसके अलावा, अधिकारियों को उन लोगों की संपत्ति फ्रीज करने का अधिकार देने पर जोर दिया गया है, जिन पर इन घोटालों में शामिल होने का आरोप है। RBI को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे संदिग्ध ‘मनी म्यूल’ बैंक खातों को अस्थायी रूप से होल्ड करने के लिए एक मानक प्रक्रिया तैयार करें।
क्या है पूरा मामला
यह मामला अक्टूबर 2025 में शुरू हुआ था, जब एक वरिष्ठ नागरिक दंपत्ति को CBI और इंटेलिजेंस ब्यूरो के अधिकारी बनकर ठगों ने ₹1.5 करोड़ का चूना लगाया था। इसके बाद कोर्ट ने CBI जांच के आदेश दिए थे। वर्तमान में CBI ऐसे 20 बड़े मामलों की जांच कर रही है, जिनमें से प्रत्येक में ₹10 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी हुई है। सॉलिसिटर जनरल Tushar Mehta ने कोर्ट को बताया कि सरकार पहले से ही एक व्यापक कानून का मसौदा तैयार कर रही है और एक इंटर-डिपार्टमेंटल कमिटी भी कानूनी कमियों को दूर करने पर रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रही है।
