स्विट्जरलैंड ने अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) में उड़ानों पर पाबंदी लगा दी है। यह फैसला अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले एक बड़े समझौते और फ्रांस में चल रही G7 समिट को देखते हुए लिया गया है। सरकार ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को रोका जा सके।

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हवाई क्षेत्र पर यह पाबंदी 10 जून से 18 जून 2026 तक लागू रहेगी। फ्रांस के Evian-les-Bains में 15 से 17 जून तक G7 देशों की बैठक हो रही है, जो स्विट्जरलैंड की सीमा के बिल्कुल पास है। इसी वजह से Swiss सरकार सुरक्षा के लिए लेक जेनेवा पर गश्त कर रही है और सड़कों पर भी कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच बड़ा समझौता

17 जून को स्विट्जरलैंड के Burgenstock रिसॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच एक ‘अंतरिम समझौते’ (Interim Deal) पर दस्तखत होने हैं। Swiss Foreign Ministry ने इस जगह की पुष्टि की है। इस समझौते में कई अहम बातें शामिल हैं:

  • दोनों देशों के बीच युद्धविराम (Ceasefire) होगा।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोला जाएगा।
  • ईरान को 300 अरब डॉलर के विकास फंड और तेल बिक्री की अनुमति मिलेगी।
  • ईरान यह भरोसा दिलाएगा कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।
  • लेबनान जैसे इलाकों में भी लड़ाई रोकने की बात कही गई है।

इस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति JD वेंस और ईरानी संसदीय स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने शुरुआती तौर पर डिजिटल तरीके से साइन किए हैं।

किन्हें मिलेगी पाबंदी और कौन है जिम्मेदार

Federal Office of Civil Aviation (FOCA) ने बताया है कि यह पाबंदी मुख्य रूप से ड्रोन (Unmanned aircraft), बिना कमर्शियल लाइसेंस वाली फ्लाइट्स और VFR फ्लाइट्स पर लागू होगी। इन नियमों की जानकारी NOTAM के जरिए पायलटों को दी गई है।

स्विट्जरलैंड की सेना और नागरिक उड्डयन विभाग इन सुरक्षा नियमों को लागू करने में जुटे हैं। इससे पहले मार्च और अप्रैल 2026 में भी स्विट्जरलैंड ने अपनी तटस्थता (Neutrality) के कारण ईरान विवाद से जुड़ी कई अमेरिकी सैन्य उड़ानों को अनुमति नहीं दी थी।