सीरिया का बड़ा कदम, दमिश्क के पास इसराइली ड्रोन हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय मदद की लगाई गुहार

सीरियाई विदेश मंत्रालय ने हाल ही में दमिश्क के पश्चिमी ग्रामीण इलाकों में एक नागरिक वाहन पर हुए इसराइली ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की है। यह घटना 22 अगस्त 2026 को हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। सीरियाई प्रशासन ने इस हमले को देश की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन बताया है। सीरिया ने साफ तौर पर कहा है कि इस तरह की कार्रवाइयों के गंभीर परिणाम होंगे और इसके लिए पूरी तरह इसराइल जिम्मेदार है। सीरियाई सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे अपनी कानूनी और राजनीतिक जिम्मेदारियों को निभाते हुए इस तरह के सैन्य अभियानों को तुरंत रोकें।
इसराइल का पक्ष और क्षेत्रीय तनाव
दूसरी ओर, इसराइल डिफेंस फोर्सेस यानी IDF ने इस ऑपरेशन की पुष्टि की है। इसराइली सेना का कहना है कि यह हमला एक ऐसे आतंकी ऑपरेटिव को बेअसर करने के लिए किया गया था जो इसराइली सैनिकों के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ था। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इस क्षेत्र में तनाव पहले से ही काफी बढ़ा हुआ है। इससे पहले 18 अगस्त को अबू अल-धुहूर एयरबेस पर भी एक हमला हुआ था। अमेरिकी विशेष दूत टॉम बराक ने एयरबेस पर हुए उस पुराने हमले की आलोचना करते हुए उसे गलत खुफिया जानकारी पर आधारित अनावश्यक तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया था, जिसके पीछे इसराइल की घरेलू चुनावी राजनीति का हाथ हो सकता है।
इसराइल और तुर्की के बीच बढ़ती कूटनीतिक दूरी
इस बीच, इसराइल और तुर्की के बीच कूटनीतिक दूरियां और ज्यादा बढ़ गई हैं। तुर्की द्वारा इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ इंटरपोल रेड नोटिस की मांग किए जाने के बाद, इसराइली प्रधानमंत्री कार्यालय ने तुर्की के राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोआन को एक यहूदी विरोधी तानाशाह करार दिया और सीरिया में तुर्की के दखل को रोकने की बात कही। इसके बाद से सऊदी अरब, कतार, जॉर्डन, पाकिस्तान और तुर्की समेत 12 देशों के एक समूह ने 1974 के डिसएंगेमेंट समझौते का पालन करने और सीरियाई क्षेत्रों से इसराइली सेना को पूरी तरह हटाने की मांग की है। इन देशों का कहना है कि साल 2024 के अंत में बशर अल-असद की सरकार के पतन के बाद से पुरानी सुरक्षा व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।