सीरिया के पूर्व ग्रैंड मुफ़्ती अहमद बद्रेद्दीन हस्सू को उम्रकैद की सजा, अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला

Praggya Singh sabal24 August 20262 min read61 viewsWorld
सीरिया के पूर्व ग्रैंड मुफ़्ती अहमद बद्रेद्दीन हस्सू को उम्रकैद की सजा, अदालत ने सुनाया बड़ा फैसला

सीरिया के पूर्व ग्रैंड मुफ़्ती Ahmad Badreddin Hassoun को सीरिया की एक अदालत ने सोमवार, 24 अगस्त 2026 को उम्रकैद की सजा सुनाई है। यह फ़ैसला दमिश्क की चौथी क्रिमिनल कोर्ट द्वारा अपनी छठी सुनवाई के दौरान सुनाया गया, जिसकी अध्यक्षता जज Fakhr al-Din al-Aryan ने की। बशर अल-असद की सरकार के पतन के बाद न्याय की दिशा में इसे एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

अदालत में हुई सुनवाई और आरोप

हस्सू ने साल 2005 से 2021 तक सीरिया के ग्रैंड मुफ़्ती के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं। उन पर सीरिया के लगभग 14 साल लंबे चले गृहयुद्ध के दौरान कई गंभीर अपराध करने का दोष साबित हुआ है। मार्च 2025 में देश छोड़कर भागने की कोशिश के दौरान उन्हें हिरासत में लिया गया था, जिसके बाद 25 जून 2026 से उनका औपचारिक ट्रायल शुरू हुआ था। इस अदालती कार्रवाई के दौरान नेशनल कमीशन फॉर ट्रांजिशनल जस्टिस और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

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नेशनल कमीशन फॉर ट्रांजिशनल जस्टिस के अकाउंटेबिलिटी एंड जस्टिस डिपार्टमेंट के निदेशक Radif Mustafa ने इस बात पर जोर दिया कि यह अदालत का फैसला न्यायिक जवाबदेही की दिशा में बहुत जरूरी है। अदालत ने हस्सू को हिंसा भड़काने, अल-असद सरकार को धार्मिक और राजनीतिक वैधता देने और हत्याओं को सही ठहराने जैसे मामलों में दोषी करार दिया। इसके अलावा, उन पर अपने पद का दुरुपयोग करके पूर्व शासन के शीर्ष सैन्य अधिकारियों और मिलिशिया नेताओं के साथ अवैध संबंध बनाए रखने के भी गंभीर आरोप थे।

हिंसा और सैन्य हस्तक्षेप का समर्थन

ट्रायल के दौरान पेश किए गए सबूतों से यह भी सामने आया कि हस्सू ने सीरिया में रूस और ईरान के सैन्य हस्तक्षेप का खुलकर समर्थन किया था। इसके अलावा उन्होंने Issam Zahreddine और Qassem Soleimani जैसे सैन्य अधिकारियों का भी सार्वजनिक मंचों से समर्थन किया था। अभियोजकों ने अदालत के सामने यह साबित किया कि हस्सू ने अपने मीडिया रसूख का इस्तेमाल करके सांप्रदायिक तनाव को हवा दी और विद्रोही नियंत्रण वाले इलाकों विशेषकर पूर्वी अलेप्पो और इदलिब के आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दिया।

मानवाधिकार संगठनों ने अपनी रिपोर्टों में यह भी खुलासा किया कि उनके कार्यकाल के दौरान सेदनाया जेल में हजारों गुप्त फांसी की सजाओं को मंजूरी देने में भी उनकी संलिप्तता रही थी। अदालत द्वारा दिए गए इस कड़े फैसले से सीरियाई समाज में न्याय की उम्मीद जगी है और पीड़ितों के परिवारों को कुछ हद तक राहत मिलती दिख रही है।

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