जॉर्डन में हुई सीरिया और इसराइल की गुप्त बैठक, अमेरिका की मध्यस्थता से बनेगी नई सुरक्षा व्यवस्था.

सीरिया और इसराइल के बीच तनाव को कम करने के लिए जॉर्डन की राजधानी में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस गुप्त बैठक में सीरियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व विदेश मंत्री Asaad al-Shaibani ने किया, जिसमें देश की खुफिया एजेंसियों के प्रमुख भी शामिल थे। अमेरिका की मध्यस्थता से हुई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर शांति स्थापित करना और एक मजबूत सुरक्षा ढांचा तैयार करना था। इस महत्वपूर्ण बैठक के दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने आपसी तनाव को घटाने और भविष्य में होने वाले सैन्य टकरावों को रोकने के उपायों पर खुलकर चर्चा की।
तनावपूर्ण माहौल के बीच हुई उच्च स्तरीय बातचीत
यह बैठक ऐसे समय में हुई जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव अपने चरम पर था। इससे पहले 14 अगस्त 2026 को सीरियाई विदेश मंत्री और इसाईली मोसाद निदेशक Roman Gofman के बीच फोन पर बातचीत हुई थी, जो जॉर्डन के इस शिखर सम्मेलन में भी मौजूद बताए गए। स्थिति तब और अधिक तनावपूर्ण हो गई जब 18 अगस्त 2026 को अबू अल-धुहूर सैन्य एयरबेस पर इस्राइल ने हवाई हमला कर दिया। अमेरिका के सीरिया के लिए विशेष दूत Tom Barrack ने इस हमले को एक अनावश्यक कदम बताया जिससे तुर्की के साथ विवाद बढ़ने का खतरा पैदा हो गया था। इसराइल के प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस पूरी बैठक पर आधिकारिक तौर पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
जॉर्डन में विशेष ऑपरेशन रूम बनाने का प्रस्ताव
सीरियाई मीडिया से मिली जानकारी के अनुसार, इस बैठक में जॉर्डन के अंदर अमेरिका की देखरेख में एक विशेष ऑपरेशन रूम बनाने पर विचार किया गया ताकि दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने आने से बच सकें। सीरियाई अधिकारियों ने अपनी राष्ट्रीय संप्रभुता पर जोर देते हुए साफ किया कि किसी भी सुरक्षा समझौते में देश की आजादी का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। सीरियाई पक्ष ने मांग की कि इस्राइली सेना को 8 दिसंबर 2024 से पहले वाली स्थिति में वापस लौटना चाहिए और 1974 के डिसएंगेजमेंट समझौते को पूरी तरह लागू किया जाना चाहिए। सीरिया ने यह भी स्पष्ट किया कि गोलान हाइट्स उनका ही हिस्सा है और वे अबू अल-धुहूर सैन्य अड्डे पर तुर्की की स्थायी सैन्य मौजूदगी को किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेंगे।
अमेरिका की नई नीतियां और गोलान हाइट्स का मुद्दा
बैठक वाले दिन ही अमेरिकी विशेष दूत Tom Barrack ने मीडिया से बात करते हुए साफ किया कि चल रही शांति वार्ताओं के बावजूद गोलान हाइट्स पर अमेरिका की आधिकारिक नीति में कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन के समय 2019 में इस्राइली संप्रभुता को दी गई मान्यता को फिर से दोहराया। इसके साथ ही, अमेरिका इस क्षेत्र में सीरिया, इस्राइल और तुर्की को शामिल करते हुए एक नया त्रिपक्षीय तंत्र बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि इस अस्थिरता को सीरियाई सीमाओं के अंदर फैलने से रोका जा सके।