सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने इसराइल के साथ सुरक्षा समझौते की बात की, लेकिन रिश्ते सुधारने से किया साफ़ इंकार

सीरिया के राष्ट्रपति अहमद अल-शारा ने हाल ही में एक इंटरव्यू में इसराइल के साथ संभावित सुरक्षा समझौते को लेकर बड़ी बात कही है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच एक नया सुरक्षा समझौता हो सकता है जिससे शांति बहाल हो सके, लेकिन सीरिया गोलान हाइट्स पर अपने अधिकार से पीछे नहीं हटेगा। इसके साथ ही उन्होंने इसराइल के साथ कूटनीतिक रिश्तों को पूरी तरह से सामान्य करने की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया है। सीरिया का मकसद इस समय कई अन्य देशों को साथ लेकर इसराइल पर दबाव बनाना है ताकि वह अपनी क्षेत्रीय नीतियों में बदलाव करे।
सैन्य तनाव और हमलों का सिलसिला
यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्र में सैन्य तनाव काफी बढ़ गया है। पिछले दिनों 19 अगस्त 2026 को इसराइल ने इरबिल के अबू अल-धुहूर मिलिट्री एयरपोर्ट पर हवाई हमला किया था। इस घटना के बाद सीरियाई विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने किसी भी तरह के औपचारिक सुरक्षा समझौते से इनकार किया था। सीरिया का कहना है कि वह ऐसा कोई समझौता नहीं करेगा जिससे उसके नागरिक और सैन्य संस्थानों के विकास पर रोक लगे या क्षेत्रीय स्थिरता में उसकी भूमिका कम हो। सीरियाई विदेश मंत्री असद अल-शिबानी ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इनके पीछे कोई सुरक्षा से जुड़ा वैध कारण नहीं था।
अमेरिका और तुर्की की प्रतिक्रिया
इसराइल की तरफ से इडलिब प्रांत में किए गए इन हमलों पर 20 अगस्त 2026 को अमेरिका और तुर्की ने कड़ी आपत्ति जताई। इसराइली प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू के कार्यालय का दावा था कि इस एयरबेस पर तुर्की के सैनिक मौजूद थे जिससे सुरक्षा का खतरा पैदा हो रहा था। हालांकि तुर्की ने इस आरोप को पूरी तरह बकवास बताते हुए कहा कि यह सिर्फ राजनीतिक हथकंडा है। अमेरिका के तुर्की और सीरिया के दूत टॉम बराक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इन हमलों को गैर-जरूरी तनाव बढ़ाने वाला कदम बताया है।
समझौतों को बचाने की कोशिश
क्षेत्र में लगातार बिगड़ते हालात के बीच अधिकारी 1974 के डिसएंगेजमेंट ऑफ फोर्सेस समझौते को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं। इस पुराने समझौते के तहत संयुक्त राष्ट्र की देखरेख में एक बफर जोन बनाया गया था। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कई बार सीरिया की सीमाओं का सम्मान करने की बात कही है और हाल ही में इसराइल द्वारा 1974 के समझौते के उल्लंघन को गलत बताया है। इस बीच तुर्की सीरियाई सेना को लगातार सैन्य ट्रेनिंग और कूटनीतिक समर्थन दे रहा है ताकि क्षेत्रीय स्थिति को संभाला जा सके।