Taiwan पर चीन का बड़ा सैन्य उकसावा, इंडोनेशियाई युद्धपोत के साथ नौसैनिक ड्रिल पर ताइपे ने जताई कड़ी आपत्ति

ताइवान के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में चीन और इंडोनेशिया की नौसेना द्वारा संयुक्त अभ्यास किए जाने की घोषणा के बाद ताइपे सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई है। ताइवान ने इस कदम को एक खतरनाक सैन्य उकसावा करार दिया है और बीजिंग से अपनी इन गतिविधियों को तुरंत रोकने की मांग की है। ताइवान के अधिकारियों का कहना है कि यह पहली बार है जब चीन ने इस इलाके में किसी विदेशी सेना के साथ इस तरह का सैन्य अभ्यास करने की बात कही है, जो पूरी तरह से असामान्य और चिंताजनक है।
ताइवान और चीन के बीच बढ़ता तनाव
पाकिस्तान के उर्दू टीवी चैनल दुनिया न्यूज़ के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन के रक्षा मंत्रालय ने 12 अगस्त को यह ऐलान किया था कि अगस्त महीने के मध्य में ताइवान के पूर्व में किसी अज्ञात स्थान पर इंडोनेशियाई नौसेना के जहाज के साथ नेविगेशन अभ्यास किया जाएगा। इस घटनाक्रम पर ताइवान की मेनलैंड अफेयर्स काउंसिल ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। काउंसिल का स्पष्ट तौर पर कहना है कि चीन अपनी समुद्री गतिविधियों के जरिए दुनिया भर के देशों को यह गलत संदेश देना चाहता है कि ताइवान के पूर्व में स्थित समंदर के हिस्सों पर केवल उसका ही अधिकार है।
ताइवान के जानकारों और अधिकारियों ने चीन की इस चाल को केवल नाम के लिए अभ्यास और असल में अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करने की रणनीति बताया है। उनका मानना है कि इस तरह के बयानों और हरकतों से ताइवान के आसपास पहले से ही बनी तनावपूर्ण स्थिति और अधिक कमजोर हो सकती है। ताइवान के जनरल स्टाफ के सहायक उप प्रमुख वू टिएन-जेन ने संसद में मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जिस इंडोनेशियाई युद्धपोत को इस ड्रिल में शामिल होने की बात कही जा रही है, वह असल में जापान से अपने देश वापस लौट रहा था।
जकार्ता से स्पष्टीकरण की मांग
ताइवान के अधिकारियों के अनुसार, यह इंडोनेशियाई नौसैनिक पोत ताइवान के पूर्व में प्रशांत महासागर में तट से करीब 70 से 80 नॉटिकल मील की दूरी पर मौजूद था। हालांकि ताइवान के सैन्य अधिकारियों का यह भी कहना है कि तकनीकी और सैन्य दृष्टि से इस गतिविधि का ताइवान की सुरक्षा पर कोई सीधा और बड़ा असर नहीं पड़ता है, लेकिन भू-राजनीतिक लिहाज से इसका बहुत बड़ा महत्व है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ताइवान के विदेश मंत्रालय ने इंडोनेशियाई सरकार से संपर्क साधा है और इस संयुक्त अभ्यास में उनकी भागीदारी को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण मांगा है। हालांकि, दूसरी तरफ से इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय और नौसेना ने इस पूरे मामले पर अभी तक कोई भी टिप्पणी नहीं की है।
दिलचस्प बात यह है कि चीन की तरफ से इस सैन्य अभ्यास की घोषणा ठीक उस समय सामने आई जब अमेरिकी रक्षा विभाग के नीति मामलों के अंडर सेक्रेटरी एलब्रिज कोल्बी जकार्ता के दौरे पर थे और उन्होंने वहां के रक्षा मंत्री सज़ाफ़्री सजाम्सुद्दीन से मुलाकात की थी। इंडोनेशियाई रक्षा मंत्रालय की तरफ से यह साफ किया गया है कि अमेरिका के साथ उनके बढ़ते हुए रक्षा सहयोग का मकसद देश में किसी भी तरह का नया अमेरिकी सैन्य अड्डा स्थापित करना बिल्कुल नहीं है।
ताइवान में चल रहा है वार्षिक हान कुआंग अभ्यास
दूसरी तरफ, चीन ताइवान को अपना ही एक हिस्सा मानता है और वहां की लोकतांत्रिक सरकार द्वारा संप्रभुता को लेकर दिए जाने वाले किसी भी दावे को कभी स्वीकार नहीं करता है। बीजिंग की सेना अक्सर ताइवान के समुद्री और हवाई क्षेत्र के आसपास आक्रामक सैन्य गतिविधियां करती रहती है। मौजूदा समय में ताइवान के अंदर देश का वार्षिक हान कुआंग सैन्य अभ्यास भी बहुत जोरों पर चल रहा है, जिसमें मुख्य रूप से इस बात की तैयारी की जा रही है कि अगर भविष्य में चीन की तरफ से कोई हमला होता है, तो इस द्वीप की सुरक्षा किस तरह से की जाएगी।
भले ही ताइवान और इंडोनेशिया के बीच किसी भी प्रकार के औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद ताइवान में 3 लाख से अधिक इंडोनेशियाई प्रवासी कामगार पूरी ईमानदारी के साथ नौकरियां कर रहे हैं और अपनी आजीविका चला रहे हैं। ताइवान की सरकार का हमेशा से यह रुख रहा है कि उनके देश के भविष्य का फैसला लेने का अधिकार केवल और केवल वहां की जनता के पास है। ताइवान ने चीन की तरफ से लगातार बढ़ाए जा रहे इस तरह के सैन्य दबाव की हमेशा की तरह इस बार भी कड़े शब्दों में निंदा की है और अंतरराष्ट्रीय नियमों का सम्मान करने की बात कही है।