Taiwan News: ताइवान के राष्ट्रपति ने चीन के नए कानून पर उठाया सवाल, वैश्विक समुदाय से की विरोध की अपील

ताइवान के राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से चीन के नए कानून का खुलकर विरोध करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि चीन का यह कदम न केवल उनकी संप्रभुता के लिए खतरा है, बल्कि इससे आम लोगों के अधिकार और स्वतंत्रता भी खतरे में पड़ते हैं। ताइपे में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक देशों को इस मामले में सतर्क रहना चाहिए और मिलकर इसका सामना करना चाहिए।
क्या है चीन का नया कानून और ताइवान की आपत्ति
ताइपे में आयोजित 10वें केटागालन फोरम–इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी डायलॉग के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए राष्ट्रपति लाइ चिंग-ते ने साफ किया कि ताइवान हर हाल में लोकतंत्र और शांति के रास्ते पर चलता रहेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि चीन का यह नया नियम राजनीतिक सेंसरशिप और सीमा पार से लोगों को डराने-धमकाने का काम करता है। उनके मुताबिक, इस तरह की नीतियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए ठीक नहीं हैं और इससे दुनिया भर के लोकतांत्रिक देशों को मिलकर निपटना होगा।
दूसरी तरफ, चीन का अपना पक्ष है कि यह कानून देश के भीतर एकता और सामाजिक शांति बनाए रखने के लिए लाया गया है। चीन और ताइवान के बीच इस मुद्दे पर पहले से ही तनाव चल रहा है और इस नए विवाद ने दोनों के बीच की दूरियों को और बढ़ा दिया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठ चुकी है चिंता
जानकारी के अनुसार, चीन में लॉ ऑन द प्रमोशन ऑफ एथनिक यूनिटी एंडgetProgress कानून को 1 जुलाई से लागू कर दिया गया है। इस कानून के आने के बाद से ही कई मानवाधिकार संगठन और उइगर नागरिक संगठन लगातार अपनी चिंता जता रहे हैं। इन संगठनों का मानना है कि इस कानून के लागू होने से लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर असर पड़ सकता है, साथ ही इसके दूरगामी परिणाम भी गलत हो सकते हैं।