चीन के जातीय एकता कानून पर ताइवान का कड़ा रुख, राष्ट्रपति लाई ने दुनिया से मांगी मदद

Praggya Singh sabal7 August 20262 min read60 viewsWorld
चीन के जातीय एकता कानून पर ताइवान का कड़ा रुख, राष्ट्रपति लाई ने दुनिया से मांगी मदद

ताइवान के राष्ट्रपति Lai Ching-te ने हाल ही में चीन द्वारा लागू किए गए नए 'एथनिक यूनिटी' यानी जातीय एकता कानून के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से समर्थन मांगा है। उन्होंने इस कानून को ताइवान की संप्रभुता के लिए खतरा बताते हुए कहा कि यह केवल एक राजनीतिक कदम नहीं है, बल्कि इससे मानवाधिकारों और अभिव्यक्ति की आजादी पर भी गहरा असर पड़ सकता है। ताइपे में आयोजित 10वें केटागालन फोरम–इंडो-पैसिफिक सिक्योरिटी डायलॉग के उद्घाटन कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने अपनी बात मजबूती से रखी।

कानून से जुड़े गंभीर खतरे

राष्ट्रपति लाई ने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि चीन का यह नया कानून राजनीतिक सेंसरशिप को बढ़ावा देता है। उनके मुताबिक, इस नियम का इस्तेमाल सीमा-पार दमन के लिए किया जा सकता है, जो लोकतांत्रिक देशों के लिए एक बड़ी चेतावनी है। ताइवान का साफ मानना है कि शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए अब वैश्विक सहयोग बहुत जरूरी हो गया है। उन्होंने साफ कर दिया है कि ताइवान लोकतंत्र और शांति की अपनी राह पर अडिग रहेगा और किसी भी दबाव के सामने नहीं झुकेगा।

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चीन का तर्क और विवाद की स्थिति

दूसरी तरफ, चीन का कहना है कि 'लॉ ऑन द प्रमोशन ऑफ एथनिक यूनिटी एंड प्रोग्रेस' को लाने का मकसद केवल राष्ट्रीय एकता और समाज में भाईचारा बढ़ाना है। यह कानून चीन में 1 जुलाई से लागू किया गया है। चीन और ताइवान के बीच इस मुद्दे पर मतभेद नए नहीं हैं, लेकिन इस कानून के आने के बाद तनाव और बढ़ गया है। दुनिया भर के मानवाधिकार संगठनों और उइगर समुदायों ने भी इस कानून को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनका मानना है कि यह नियम लोगों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को दबाने का काम कर सकता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय

विभिन्न मानवाधिकार समूहों का कहना है कि इस कानून की आड़ में कुछ ऐसे प्रावधान जोड़े गए हैं जो सीमाओं के पार भी असर डालेंगे। इससे न केवल चीन के अंदर बल्कि बाहरी देशों में रह रहे लोगों की निजता और अधिकारों पर भी सवाल उठ रहे हैं। ताइवान की सरकार अब इस मसले पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और अधिक सक्रिय होने की तैयारी कर रही है ताकि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और नियम-आधारित व्यवस्था को बनाए रखा जा सके। इस पूरी स्थिति पर नजर रखने वाले जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में चीन और ताइवान के बीच कूटनीतिक खींचतान और तेज हो सकती है। आप इस विषय से जुड़ी विस्तृत जानकारी Hindusthan Samachar के माध्यम से भी देख सकते हैं।

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