दक्षिण चीन सागर विवाद: ताइवान ने स्कारबोरो शोल पर फिर ठोका अपना दावा, फिलीपींस के संयुक्त राष्ट्र में नक्शा जमा करने के बाद सामने आया बयान.

दक्षिण चीन सागर को लेकर चल रहे पुराने और गंभीर क्षेत्रीय विवाद में एक नया मोड़ सामने आया है, जहां ताइवान ने रविवार को स्कारबोरो शोल सहित अपने से जुड़े सभी द्वीपों पर संप्रभुता के अपने दावे को एक बार फिर पूरी मजबूती से दोहराया है। यह ताजा बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में फिलीपींस ने स्कारबोरो शोल से संबंधित आधिकारिक समुद्री नक्शा संयुक्त राष्ट्र में औपचारिक रूप से जमा कर अपने दावे को दुनिया के सामने दोबारा मजबूती से प्रस्तुत किया है, जिससे इस क्षेत्र में तनाव एक बार फिर बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ताइवान के विदेश मंत्रालय का आधिकारिक बयान
इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए ताइवान के विदेश मंत्रालय यानी MOFA ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि दक्षिण चीन सागर से जुड़े जितने भी आपसी विवाद हैं, उन सभी का समाधान किसी भी सैन्य टकराव या बल प्रयोग के बजाय केवल अंतरराष्ट्रीय कानून और समुद्री कानून के नियमों के अनुरूप ही शांतिपूर्ण तरीकों से किया जाना चाहिए। मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर और बहुपक्षीय विवाद निपटान से जुड़ी प्रक्रियाओं में ताइवान की सक्रिय भागीदारी की मांग भी पुरजोर तरीके से उठाई है ताकि क्षेत्रीय मामलों में उसकी आवाज को भी उचित स्थान मिल सके।
फिलीपींस का संयुक्त राष्ट्र में कदम और नौवहन चार्ट
ताइवान की प्रमुख समाचार एजेंसी CNA से मिली जानकारी के अनुसार, फिलीपींस सरकार ने संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन के निर्धारित प्रावधानों के तहत ही स्कारबोरो शोल का आधिकारिक नौवहन चार्ट सीधे संयुक्त राष्ट्र को सौंपा है। फिलीपींस का यह साफ तौर पर कहना है कि उसने यह कदम अपने समुद्री अधिकारों और अपने क्षेत्रीय दावे को कानूनी रूप से पूरी तरह स्पष्ट करने के लिए ही उठाया है, ताकि भविष्य में इस पर किसी तरह का कोई संशय या भ्रम न बना रहे।
विवादित क्षेत्र और अलग-अलग नाम
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले इस स्कारबोरो शोल पर फिलीपींस, ताइवान और चीन तीनों ही देश अपना-अपना अधिकार और संप्रभुता जताते हैं। फिलीपींस इस विवादित क्षेत्र को बाजो दे मासिनलोक के नाम से जानता है, जबकि ताइवान इसे डेमोक्रेसी रीफ कहता है और इसके विपरीत चीन इसे हुआंगयान दाओ के नाम से संबोधित करता है, जिससे यह भू-राजनीतिक मोर्चे पर एक पेचीदा मुद्दा बन चुका है।
चीन की कड़ी आपत्ति और ताइवान की शांति की अपील
इससे ठीक पहले, चीन के विदेश मंत्रालय ने फिलीपींस द्वारा उठाए गए इस कदम की बेहद कड़े शब्दों में कड़ी आलोचना करते हुए इसे पूरी तरह से अवैध और निरर्थक करार दिया था। चीन का यह दावा रहा है कि हुआंगयान दाओ उसका अपना एक अभिन्न क्षेत्र है और उस पर उसकी निर्विवाद रूप से संप्रभुता के साथ-साथ आसपास के सभी संबंधित समुद्री क्षेत्रों पर पूरा अधिकार कायम है। चीन ने यह भी तर्क दिया कि अंतरराष्ट्रीय संधियों के मुताबिक स्कारबोरो शोल कभी भी फिलीपींस का हिस्सा नहीं रहा है और उनका वर्तमान दावा किसी भी अंतरराष्ट्रीय कानून के नियमों के अनुरूप नहीं बैठता है। वहीं दूसरी ओर, ताइवान ने अपने रुख को साफ करते हुए एक बार फिर दोहराया है कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सभी तरह के क्षेत्रीय विवादों का समाधान केवल आपसी संवाद और अंतरराष्ट्रीय नियमों के आधार पर ही आगे बढ़ाया जाना चाहिए।