कुवैत में युद्ध जैसे हालात के बीच भारत लौटे तमिलनाडु के एक व्यक्ति की कहानी काफी मुश्किल भरी है। वह वहां कार पार्क अटेंडेंट का काम करते थे, लेकिन अब अपने गांव में दिहाड़ी मजदूरी के लिए भटक रहे हैं। घर वापस तो आ गए, लेकिन अब परिवार का पेट पालना उनके लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।

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कुवैत से लौटने के बाद क्यों बढ़ीं मुश्किलें?

रामनाथपुरम जिले के अनिकुरुंतन गांव के रहने वाले Kalidas पिछले चार साल से Kuwait और Saudi Arabia में काम कर रहे थे। हाल ही में खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव और मिसाइल हमलों के डर के बीच उन्हें वापस भारत लाया गया। घर लौटने पर उनके सामने सबसे बड़ी समस्या पैसों की आई क्योंकि उनकी सैलरी नहीं मिल पाई। अब वह अपनी बची हुई सीमित जमापूंजी से घर का खर्च चला रहे हैं। गांव में काम के अवसर कम होने की वजह से वह कोई स्थायी दिहाड़ी मजदूरी भी नहीं ढूंढ पा रहे हैं।

भारत सरकार और MEA ने क्या कदम उठाए?

Kalidas ने अपनी सुरक्षित वापसी के लिए प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार का धन्यवाद किया है। Ministry of External Affairs (MEA) ने 22 अप्रैल 2026 को एक ब्रीफिंग में यह साफ किया था कि सरकार खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों की सुरक्षा को सबसे ऊपर रख रही है। MEA के Additional Secretary (Gulf) Aseem R Mahajan ने इन रेपेट्रिएशन कोशिशों के बारे में अपडेट दिए थे। सरकार ने बड़ी संख्या में लोगों को स्वैच्छिक तौर पर वापस लाने और उनके सफर के प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए थे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

Kalidas को कुवैत से वापस भारत क्यों आना पड़ा?

West Asia में बढ़ते संघर्ष और मिसाइल हमलों के डर के कारण उन्हें सुरक्षा कारणों से कुवैत से वापस भारत लाया गया।

वापसी के बाद Kalidas को किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है?

उन्हें अपनी सैलरी नहीं मिली है और वह अपने गांव में परिवार के गुजारे के लिए दिहाड़ी मजदूरी की तलाश कर रहे हैं।