Hormuz Strait में ADNOC के टैंकर पर मिसाइल हमला, UAE ने ईरान पर लगाया आरोप

Aanya8 August 20262 min read54 viewsUAE
Hormuz Strait में ADNOC के टैंकर पर मिसाइल हमला, UAE ने ईरान पर लगाया आरोप

हॉर्मुज जलडमरूमध्य यानी Strait of Hormuz में शनिवार, 8 अगस्त 2026 को एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के एक तेल टैंकर पर मिसाइल से हमला किया गया, जिसने पूरे खाड़ी क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है। हालांकि, अच्छी बात यह रही कि इस घटना में कोई भी व्यक्ति घायल नहीं हुआ और स्थिति को जल्द ही नियंत्रण में ले लिया गया। इस घटना के बाद से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं फिर से गहरी हो गई हैं क्योंकि यह समुद्री मार्ग व्यापार और ऊर्जा सप्लाई के लिए दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है।

UAE और Saudi Arabia की कड़ी निंदा

संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के विदेश मंत्रालय ने इस घटना को ईरान का एक 'शत्रुतापूर्ण हमला' करार दिया है। मंत्रालय का स्पष्ट आरोप है कि यह हमला ईरान के Islamic Revolutionary Guard Corps द्वारा किया गया और इसे 'समुद्री डकैती' के रूप में देखा जा रहा है। यूएई ने इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के Resolution 2817 का सीधा उल्लंघन बताया है, जो समुद्री जहाजों की सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता की गारंटी देता है। सऊदी अरब ने भी इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है और Kuwait News Agency (KUNA) के माध्यम से अपनी प्रतिक्रिया साझा की है। कतर ने भी यूएई के साथ अपनी एकजुटता दिखाते हुए कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करना अंतरराष्ट्रीय कानूनों के खिलाफ है।

क्या है ईरान का पक्ष और समुद्री सुरक्षा पर असर

ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के प्रवक्ता Hossein Mohebbi ने अपने बयान में कहा है कि जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने का निर्णय अमेरिका द्वारा ईरान की शर्तों को मानने पर निर्भर करेगा। उन्होंने इसे ओमान और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं से जोड़ने से साफ इनकार कर दिया है। यह बयान इस तनाव को और अधिक जटिल बनाता है। ADNOC की रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी 2026 से लेकर अब तक उनके कुल 15 जहाजों को मिसाइल और ड्रोन हमलों का सामना करना पड़ा है। इनमें से तीन हमले तो पिछले एक हफ्ते के भीतर हुए हैं, जिनमें एक कर्मचारी की जान भी गई है और 20 लोग घायल हुए हैं। इन लगातार हो रहे हमलों के कारण इस समुद्री मार्ग से होने वाले व्यापार और जहाजों की आवाजाही में भारी कमी दर्ज की गई है, जिसका सीधा असर वैश्विक तेल सप्लाई पर पड़ रहा है।

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