भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हाल ही में बैंकिंग सेक्टर से जुड़ी एक अहम जानकारी साझा की है। Tata Motors Finance और Piramal Enterprises जैसी बड़ी कंपनियों सहित कुल आठ गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) ने अपने लाइसेंस यानी पंजीकरण प्रमाण पत्र वापस कर दिए हैं। केंद्रीय बैंक ने 10 फरवरी, 2026 को आधिकारिक तौर पर यह घोषणा की है कि इन संस्थाओं ने अपना रजिस्ट्रेशन सरेंडर कर दिया है।

आखिर क्यों कंपनियों ने वापस किया लाइसेंस?

इन बड़ी कंपनियों द्वारा लाइसेंस वापस करने के पीछे मुख्य कारण इनका अपनी सहयोगी कंपनियों के साथ विलय होना है। Tata Motors Finance का विलय पिछले साल 8 मई, 2025 को Tata Capital के साथ हो गया था। इसी तरह Piramal Enterprises का विलय सितंबर 2025 में Piramal Finance के साथ हुआ था।

चूंकि अब ये कंपनियां नई संरचना के तहत काम कर रही हैं, इसलिए पुराने लाइसेंस को सरेंडर करना एक जरूरी और सामान्य प्रक्रिया थी। ये संस्थाएं अब अपने नए नाम और ढांचे के साथ मार्केट में काम करना जारी रखेंगी, इसलिए पुराने परमिट की जरुरत खत्म हो गई थी।

इन 6 अन्य कंपनियों ने भी लौटाया परमिट

टाटा और पीरामल के अलावा छह अन्य छोटी कंपनियों ने भी अपने लाइसेंस वापस किए हैं। इस लिस्ट में AAR Shyam India Investment Company, Rama Investment Company, Sri Ramachandra Enterprises, Sri Nirman, Ankita Pratishthan और Mayuka Investment शामिल हैं।

इसी बीच RBI छोटे NBFCs के लिए नियम बदलने पर भी विचार कर रहा है। बैंक ने ऐसे NBFCs के लिए छूट का प्रस्ताव दिया है जिनकी संपत्ति 1,000 करोड़ रुपये से कम है और जो आम लोगों से पैसा जमा नहीं करते। इस प्रस्ताव पर सुझाव देने की तारीख 4 मार्च, 2026 रखी गई है।

Nura Basta

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