ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों में मंगलवार 3 मार्च 2026 को भारी बमबारी और धमाके हुए। इजरायल और अमेरिका की सेना ने मिलकर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ शुरू किया है जिसके तहत तेहरान के उत्तरी, पूर्वी और दक्षिणी इलाकों को निशाना बनाया गया। इस सैन्य कार्रवाई का असर अब पूरे मिडिल ईस्ट पर दिखने लगा है जिससे वहां रहने वाले प्रवासियों और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासियों और उड़ानों पर क्या असर हुआ?
क्षेत्र में बढ़ते तनाव को देखते हुए दुबई, दोहा और कुवैत जैसे प्रमुख शहरों में सुरक्षा चेतावनी जारी की गई है। खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और अन्य प्रवासियों के लिए निम्नलिखित अपडेट जरूरी हैं:
- दुबई और दोहा जैसे बड़े हवाई अड्डों पर उड़ानों को रद्द किया गया या उनके रास्ते बदले गए।
- कुवैत, यूएई, सऊदी अरब और कतर में रहने वाले लोगों को हवाई हमलों की चेतावनी के दौरान सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई।
- ओमान के दुकम पोर्ट पर ईंधन टैंक को निशाना बनाए जाने के बाद तेल उत्पादन और सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है।
- पूरे ईरान में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से ठप हो गया है जिससे संपर्क करना मुश्किल हो रहा है।
हमले में अब तक कितना नुकसान हुआ और कौन से ठिकाने निशाने पर रहे?
ईरानी रेड क्रीसेंट के आंकड़ों के मुताबिक इस संघर्ष में अब तक देश भर में 555 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। इजरायली वायुसेना ने लगभग 100 विमानों की मदद से ईरान के कमांड सेंटरों को निशाना बनाया है। मुख्य तौर पर इन जगहों को नुकसान पहुंचा है:
| निशाना बनाया गया स्थान | नुकसान का विवरण |
|---|---|
| IRIB मुख्यालय | ईरानी सरकारी मीडिया का मुख्यालय पूरी तरह तबाह हुआ। |
| नेतृत्व परिसर | राष्ट्रपति कार्यालय और सुरक्षा परिषद की इमारत पर 250 से ज्यादा हमले हुए। |
| असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स | 88 सदस्यों वाली असेंबली की इमारत बमबारी में जमींदोज हुई। |
| अन्य शहर | करज, इस्फहान और कोम जैसे शहरों में भी भारी धमाके हुए। |
विभिन्न देशों और संगठनों के आधिकारिक बयान क्या हैं?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने साफ किया है कि इस अभियान का मकसद ईरान की सैन्य और मिसाइल क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है। उन्होंने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में और भी कड़े हमले हो सकते हैं। वहीं ईरान की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने कहा है कि उनका देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए लंबी जंग के लिए तैयार है। परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने रिपोर्ट दी है कि नतांज जैसे परमाणु केंद्रों को फिलहाल कोई नुकसान नहीं पहुंचा है।
