Tehran-Washington Talks: अमेरिका के विरोधाभासी बयानों से फेल हुई ईरान और अमेरिका की बातचीत, पाकिस्तान में नहीं बनी बात

ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हुई बातचीत नाकाम हो गई है। रूसी राजनयिक मिखाइल उल्यानोव ने बताया कि अमेरिका के अलग-अलग और विरोधाभासी बयानों की वजह से यह मीटिंग फेल हुई। इस बातचीत का मुख्य मकसद अमेरिका और इसराइल द्वारा शुरू किए गए युद्ध को खत्म करना था, लेकिन दोनों देशों के बीच कोई सहमति नहीं बन पाई।

बातचीत क्यों फेल हुई और रूसी राजनयिक ने क्या कहा?

रूसी राजनयिक Mikhail Ulyanov के मुताबिक, अमेरिका के बयानों में तालमेल की कमी थी और वे काफी जल्दबाजी में दिए गए थे। 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में करीब 21 घंटे तक बातचीत चली, लेकिन अंत में दोनों पक्ष किसी नतीजे पर नहीं पहुँच सके। ईरान का कहना है कि अमेरिका ने अपनी मांगें बहुत ज्यादा और अतार्किक रखी थीं, जिसकी वजह से बातचीत बीच में ही अटक गई।

ईरान ने अगली मीटिंग में जाने से क्यों किया मना?

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने साफ कर दिया है कि ईरान अब दूसरे दौर की बातचीत के लिए इस्लामाबाद नहीं जाएगा। ईरान ने इसके पीछे अमेरिका द्वारा युद्धविराम (ceasefire) के नियमों को तोड़ने की बात कही है।

  • बंदरगाहों की नाकेबंदी: ईरान का आरोप है कि अमेरिका ने अवैध तरीके से उसके पोर्ट्स को ब्लॉक कर रखा है।
  • जहाज पर हमला: एक कार्गो जहाज पर हमला कर ईरानी नागरिकों को बंधक बनाया गया।
  • धमकियां: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी सुविधाओं पर बमबारी और युद्ध अपराध करने की धमकियां दी हैं।

ईरान के अंदर मतभेद और डोनाल्ड ट्रंप का नया प्रस्ताव

ईरान के बड़े नेताओं के बीच इस मुद्दे पर अलग-अलग राय है। संसद स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi कूटनीति के जरिए मामला सुलझाना चाहते हैं। दूसरी तरफ, IRGC कमांडर General Ahmad Vahidi का मानना है कि जब तक अमेरिका Strait of Hormuz की नाकेबंदी रखेगा, तब तक बातचीत का कोई मतलब नहीं है।

इसी बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने 21 अप्रैल को युद्धविराम को आगे बढ़ाने का ऐलान किया। अब यह फैसला ईरान के नए सर्वोच्च नेता Mojtaba Khamenei पर है, जिनसे 22 अप्रैल को इस प्रस्ताव पर जवाब आने की उम्मीद है।