सऊदी अरब में काम करने वाले तेलंगाना के दो प्रवासी कामगारों का निधन हो गया था, जिनके शवों को 8 जुलाई 2026 को उनके पैतृक गांवों में लाया गया। इन प्रवासियों की पहचान Boddu Chandraiah (70) और Chinna Rajanna Puli (57) के रूप में हुई है। इन दोनों मामलों ने खाड़ी देशों में काम करने वाले भारतीयों के सामने आने वाली चुनौतियों और कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलताओं को उजागर किया है।

लंबा संघर्ष और कानूनी प्रक्रिया

Boddu Chandraiah का ताल्लुक सिद्धिपेट जिले के Challapuram गांव से था। वे पिछले 40 सालों से सऊदी अरब के दम्मम में रह रहे थे और 35 सालों से भारत नहीं आए थे। वे छोटे-मोटे काम करते थे और उनके पास जरूरी दस्तावेज भी नहीं थे। 27 मई 2026 को उनके निधन के बाद, उनका शव कई हफ्तों तक अस्पताल की मोर्चरी में रखा रहा क्योंकि उनका परिवार ट्रेस नहीं हो पा रहा था। बाद में कम्युनिटी वालंटियर्स ने उनके रिश्तेदारों को ढूंढ निकाला और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद शव को अंतिम संस्कार के लिए वापस भेजा जा सका।

दूसरे मामले में, निजामाबाद जिले के मारमपल्ली गांव के रहने वाले Chinna Rajanna Puli, 2013 से तबूक में काम कर रहे थे। वे अपने परिवार की मदद और कर्ज चुकाने के लिए वहां गए थे। 22 जून 2026 को अपने कमरे में हार्ट अटैक के कारण उनका निधन हो गया। रियाद में भारतीय दूतावास और स्थानीय वालंटियर्स ने No Objection Certificate (NOC) जैसी जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने में मदद की। आमतौर पर स्वाभाविक मौत के मामलों में शव को घर भेजने की प्रक्रिया में 2 से 3 हफ्ते का समय लग जाता है। तेलंगाना सरकार ने इससे पहले नवंबर 2025 में एक आधिकारिक टीम भेजकर और मुआवजे पर विचार करके प्रवासियों की मौतों के मुद्दे को संबोधित करने की कोशिश की थी।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.