यूएई सरकार ने वीजा धोखाधड़ी और श्रम कानून उल्लंघन मामले में अब तक सबसे सख्त फैसला सुनाया है। इस मामले में 161 लोगों पर कुल 152 मिलियन दिरहम (लगभग 41.48 मिलियन डॉलर) का जुर्माना लगाया गया है और सभी को देश से निर्वासित (डिपोर्ट) करने का आदेश दिया गया है। यह मामला धोखाधड़ी से रेज़िडेंसी परमिट हासिल करने और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ा है, जो यूएई के कड़े आव्रजन और श्रम नियमों को लागू करने की उसकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

161 लोगों पर भारी जुर्माना और देश से निष्कासित

दुबई की सिटिजनशिप एंड रेज़िडेंसी कोर्ट ने इन 161 व्यक्तियों को रेज़िडेंसी परमिट, व्यापार संचालन और लेबर स्पॉन्सरशिप से जुड़े गंभीर उल्लंघनों का दोषी पाया। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने अपनी कंपनियां बंद कर दीं, लेकिन अपने कर्मचारियों के वीज़ा की वैधता सुनिश्चित नहीं की। इतना ही नहीं, उन्होंने एंट्री परमिट का दुरुपयोग करते हुए व्यक्तिगत आर्थिक लाभ के लिए वीज़ा का अवैध रूप से व्यापार और बिक्री भी की।

श्रम कानून और स्पॉन्सरशिप नियमों का उल्लंघन

नेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, इन आरोपियों में कई एशियाई देशों के नागरिक शामिल हैं, जिन्होंने सितंबर 2024 में अपनी कंपनियां बंद कर दी थीं। उन्होंने प्रायोजित (स्पॉन्सर्ड) कर्मचारियों के रेज़िडेंसी और वर्क परमिट को नियमित नहीं किया, जो यूएई श्रम कानून (फेडरल लॉ नंबर 8 ऑफ 1980) का सीधा उल्लंघन है। इस कानून के अनुसार, कर्मचारियों के वीज़ा और कार्य परमिट को नियमित न करने पर भारी जुर्माना, व्यवसाय बंद करना और निर्वासन जैसी सख्त सज़ाएँ दी जा सकती हैं।

ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी

यूएई की जनरल डायरेक्टरेट ऑफ़ रेज़िडेंसी एंड फ़ॉरेनर्स अफेयर्स ने बार-बार चेतावनी दी है कि वीज़ा ट्रेडिंग, अवैध स्पॉन्सरशिप या बिना वैध दस्तावेज़ों के लोगों को काम पर रखना गंभीर अपराध है। यह मामला दिखाता है कि वीज़ा से जुड़ी धोखाधड़ी के खिलाफ यूएई बिल्कुल ज़ीरो टॉलरेंस नीति अपनाए हुए है।

पहले का ऐतिहासिक फैसला

इससे पहले जून 2025 में दुबई की सिटिजनशिप एंड रेज़िडेंसी कोर्ट ने एक और बड़े वीज़ा घोटाले में 21 लोगों को दोषी पाया था। इस समूह ने 33 फर्जी कंपनियों के नाम पर 385 यूएई रेज़िडेंसी वीज़ा अवैध तरीके से हासिल किए और बेचे। अदालत ने उस मामले में 25.2 मिलियन दिरहम का जुर्माना लगाया था।

इन लगातार फैसलों से साफ है कि यूएई सरकार वीज़ा धोखाधड़ी को खत्म करने, श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और आव्रजन तथा श्रम व्यवस्था की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए बेहद सख्त कदम उठा रही है।