दक्षिणी लेबनान में इसराइली सैन्य विस्फोटक फटने से तीन लोगों की मौत, समझौते के बाद भी जारी है हिंसा।

Sushma Kumari20 August 20262 min read65 viewsWorld
दक्षिणी लेबनान में इसराइली सैन्य विस्फोटक फटने से तीन लोगों की मौत, समझौते के बाद भी जारी है हिंसा।

दक्षिणी लेबनान में एक बहुत ही दर्दनाक हादसा सामने आया है जहाँ इसराइली सैन्य विस्फोटक के अचानक फटने से 3 लोगों की मौत हो गई। यह घटना बुधवार, 19 अगस्त 2026 को नबातियेह गवर्नरेट के तहत आने वाले मयफादौन और जवतार अल-शार्कियाह शहरों के बीच हुई। लेबनान की नेशनल न्यूज एजेंसी यानी NNA ने मारे गए लोगों की पहचान عباس حسن ياسين यानी अब्बास हसन यासीन, علي مرتضى حسن سعيد यानी अली मुर्तजा हसन सईद और علي عباس ريحان यानी अली अब्बास रेहान के रूप में की है। इस खतरनाक विस्फोट में वह संदिग्ध वस्तु शामिल थी जिसे इसराइली सेना पीछे छोड़ गई थी।

सीजफायर के बावजूद नहीं रुक रहा हमलों का सिलसिला

यह दुखद घटना तब हुई जब दोनों पक्षों के बीच अमेरिकी मध्यस्थता से 26 जून 2026 को एक सीजफायर यानी युद्धविराम समझौता साइन हुआ था। इस समझौते के तहत इसराइली सेना को धीरे-धीरे पीछे हटना था और लेबनानी सेना को वहां तैनात होना था। लेकिन इसके बावजूद लगातार समझौतों का उल्लंघन हो रहा है। लेबनान में संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन यानी UNIFIL की रिपोर्ट के मुताबिक 5 अगस्त से 16 अगस्त के बीच हर दिन औसतन 137 गोले दागे गए। केवल 19 अगस्त के दिन ही इसराइली सेना ने टालौसेह और हौला जैसे सीमावर्ती शहरों में तोप से गोले दागे और नियंत्रित धमाके किए। इतना ही नहीं, जवतार अल-शार्कियाह शहर में एक चार मंजिला स्कूल की इमारत, एक क्लिनिक, एक नर्सरी और टाउन हॉल को भी पूरी तरह जमींदोज कर दिया गया।

लेबनानी नेताओं ने जताई गहरी चिंता

लेबनानी संसद के स्पीकर नबीह बेरी ने दक्षिणी लेबनान में चल रही इस हिंसा की कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि वहां के हालात अब सहन करने योग्य नहीं हैं और आम लोगों की बुनियादी सुविधाओं तथा ऐतिहासिक जगहों को बहुत नुकसान पहुंच रहा है। वहीं दूसरी ओर, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन ने दक्षिणी लेबनान में मौजूद 5 ऐतिहासिक किलों के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। इन किलों को हाल ही में खतरे में पड़े यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों के रूप में शामिल किया गया है। संयुक्त राष्ट्र शांति मिशन के अधिकारियों का कहना है कि इस बढ़ती हिंसा की सबसे बड़ी कीमत वहां के आम नागरिक चुका रहे हैं जिन्हें जान-माल का भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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